Wednesday, 15 March 2017

We Are Nothing Without Them

Please don't forget your root 
नमस्कार
आज मैं जिनके बारे में बात करने जा रहा हूँ ,उनके बारे में जितना भी कहा जाये वो कम ही हैं ! जी हाँ ! आप  बिलकुल सही सोच रहे हैं,  मैं  पेरेण्ट्स की ही बात कर रहा हूँ !माँ - बाप क्या कुछ नही करते हमारे लिए ! और हम क्या करते हैं , जब उनको हमारी सबसे ज्यादा जरुरत होती हैं , तो उनसे मुंह मोड़ लेते हैं ! आखिर क्यों ?उनका गुनाह क्या रहता हैं ? यही कि बच्चे के जन्म के बाद खुद के बारे में सोचना ही छोड़ देते   हैं ! जो लोग हमेशा मस्ती करनेवाले होते हैं , वो भी पेरेंट्स  बनने के बाद गंभीर  हो जाते हैं !  उनकी अपनी खुशी क्या थी ? अपने सपने क्या थे ? , सब कुछ भूलकर अपने बच्चों की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी देखने लगते हैं ! उन्ही के सपनों को अपना मानकर बच्चों के सारे सपने पुरे होने  की कामना करते हैं !
माँ - बाप चाहे कितने भी परेशान क्यों न हों ! चाहे उन्हें कितनी भी तकलीफें क्यों न हो , वे अपनी तकलीफें  बच्चों के सामने नही लाना चाहते हैं , ताकि हमे कोई परेशानी न हो ! वो अपनी तकलीफों में खुद ही खोये रहते हैं और हम उनसे कुछ पूछने का कष्ट  नही करना चाहते !आखिर क्यों ? बार बार मेरे मुंह से यही सवाल निकलता हैं ! हमे कुछ भी चाहिए होती हैं और जैसे ही हम अपने पेरेंट्स से कहते हैं , तो  भले ही उनके पास  वो चीज खरीदने के या देने के क्षमता नही होती हैं ,  लेकिन कहीं न कहीं से वो हमारी हर ख्वाहिश को  पूरा करने की  कोशिश करते हैं ! क्यों ?
वो भी पेरेंट्स ही होते हैं जिन्हें अपने खाने की चिंता तो नही रहती हैं फिर भी दिन भर कूड़े  के  ढेर से  जिंदगी तलाशते रहते हैं कि सायद कुछ मिल जाता तो मेरा बच्चा जो भूख की तपिश में पूरी तरह से खाली खाने की प्लेट से कुछ तलाशने की कोशिश कर रहा होगा , उसके लिए कुछ ले लेता ! ये होता हैं माँ - बाप का प्यार ! और वही बच्चा  जब बड़ा हो जाता हैं   तो  झुककर प्रणाम भी नही कर सकता ! अगर कमर में दर्द हो गया तो !
लेकिन मैं यह बात अच्छी तरह से जानता हूँ कि भले ही दुनिया कितनी भी क्यों न बदल जाये , लेकिन हम भारतीय अपनी जिम्मेदारियों को नही भूल सकते ! चाहें हम कहीं भी क्यों न रहें , उनका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ  साये की तरह रहता हैं जो हमें हर तरह की परेशानियों  को झेलने की शक्ति देता हैं !
इसलिए , हम उन्हें कभी नही भूल सकते ! और याद रखें कि एक न एक दिन तो हम भी पेरेंट्स बनेंगे और जो चीजें हमारे बच्चे देखेंगे , वही तो सीखेंगे !
अंततः  हमे  यह फिर से साबित करना हैं कि  हम भारतीय अभी भी अपने संस्कारों को नहीं भूले हैं और नाहिं भूलेंगे !
                                                                                                                          धन्यवाद
                                                                                                                                               शुभ रात्रि


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