Saturday, 29 April 2017

                        कभी न रुकना चलते जाना
                         भीड़ बहुत तेरे गलियारे 
                         लगते होंगे अपने सारे 
                         खोज सको तो, खोज लो रही 
                           कस्ती के हैं कौन सहारे 
                                                              अगर किनारा न मिल पाए 
                                                              कहीं दूर तट नजर न आये 
                                                               नाव तभी भी खेते जाना 
                                                              कभी न  रूकना चलते जाना 
                       कुछ लोग तुम्हे मिल जायेंगे 
                       जीवन भर साथ निभाएंगे 
                        दर्द तुम्हे, महसूस उसे ,
                        पर, दर्द नहीं दिखलाएंगे 
                                                                वो लोग न तुम से रूठेंगे 
                                                                चाहे बाकी सब छूटेंगे 
                                                                बस उन्हें छोड़कर मत जाना 
                                                                फिर कभी न रुकना चलते जाना 


Thursday, 20 April 2017

Our Traffic System And Role Of People In This

नमस्कार
मैं ऐसे ही मुद्दों को उठता हूँ जो हमारे समाज और लोगों को प्रभावित करते हैं  और जिससे हमारे समाज , राज्य , देश और संसार का कल्याण हो !
मैं आज बात कर रहा हूँ अपने ट्रैफिक सिस्टम की ! क्यूंकि हम सब जानते हैं कि ये आज कितनी बड़ी समस्या बन चुकी हैं ! रोज हजारों लोग सिर्फ इसकी वजह से  अपने प्राणों  से हाथ धो बैठते हैं क्यूंकि जाम के कारण वो सही समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाते हैं ! हम सड़क से चलते हैं तो अनायास ही कई एम्बुलैस जाम में फंसे हुए नजर आते हैं ! हमे तो इससे ज्यादा फर्क नहीं परता क्यूंकि वो हमारे करीबी नहीं होते हैं लेकिन आपको अगर सच्चाई जाननी हो तो  उस मरीज के साथ बैठे परिजनों की आँखों में झाँकने की कोशिश कीजिये ! आपको सब नजर आ जायेगा ! वो डबडबाई आँखों से ट्रैफिक सही होने का इंतजार करते रहते हैं आंखे बंद करके भगवान् से प्रार्थना करते रहते हैं कि  ट्रैफिक सही हो जाये लेकिन उन्हें ये ख्याल नहीं रहता कि ये समस्याएं तो मानव निर्मित हैं इसमें भगवान् क्या कर सकते हैं !
ट्रैफिक जाम के लिए हम भी कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं ! मैं आपको वाकया बताता हूँ कि जब भी मैं कहीं पैदल जा रहा होता हूँ तो चौराहों पर ट्रैफिक कहीं कहीं रुका हुआ मिलता हैं क्यूंकि एक तरफ की गाड़ियां पास हों तभी तो दूसरी तरफ की होंगी ! तो मैं भी इन्तजार करता रहता हूँ कि गाड़ियां पास हो जाये उसके बाद उस पार चला जाये !  आपको बता दूँ कि मेरे साथ अगर  10 लोग खड़े हों तो उसमे से 8 वहां रुकना नहीं चाहते और तेज रफ़्तार गाड़ियों के बिच दौर परते हैं अधेड़ उम्र के लोग भी बच्चों जैसा बर्ताव करते हैं मजबूरन कुछ गाड़ियां धीमी हो जाती हैं जिससे ट्रैफिक बहुत हद तक प्रभावित होता हैं ! आप ही सोचिये कि अगर दो  मिनट इंतजार कर लिया जाये तो कौन सा मोदी जी का भाषण छूटा  जा रहा होता हैं ! अगर समाज के लिए नहीं तो कम से कम अपने और अपने परिवार के बिषय में तो सोचना चाहिए ! नहीं तो क्या भरोसा हैं कि सभी गाड़ियां धीमी हो ही जाएगी ! और उस स्थिति में उसपर कोई आरोप भी नहीं लग सकता हैं क्योंकि नियम तो आप ही ने तोड़ा था न !
हमे ट्रैफिक सिस्टम को सुचारु रूप से चलने में मदद करनी ही चाहिए क्योंकि ये किसी और की नहीं ,हमारी खुद की ही मदद हैं !
आज कई जगह ट्रैफिक बत्तियों से कण्ट्रोल होने लगा हैं ! लेकिन फिर भी पुलिस की ड्यूटी जस की तस हैं क्यूंकि अब ट्रैफिक लाइट से भी रूल को follow करवाने के लिए पुलिस चाहिए क्यूंकि लोग लाइट को भी नहीं मानते हैं और नियम तोड़ देते हैं ! मैं समझता हूँ कि जब तक हमे खुद जिम्मेदारियों का एहसास नही होगा तब तक सरकार कुछ भी कर ले , मगर ज्यादा कुछ बदलने वाला नहीं हैं ! हमे खुद भी समझना होगा और लोगों को भी जागरूक करना होगा ! तभी हम इस जाम रूपी दानव से छुटकारा पा सकते हैं जो रोज जिंदगियां लील रहा हैं !
और आप यकीन मानिये की अगर हम सही हो जाएँ तो एक बेहतर समाज की रचना को कोई नहीं रोक सकता !

Monday, 17 April 2017

Truth Of Our System


 कुछ दिन पहले मैं एक आदमी से मिला था  जो कि मेरे एक मित्र का मित्र था ! तो बहुत दिनों के बाद दोनों की मुलाकात हुई थी ,तो वो आपस में बात करने लगे ! वो आदमी मेरे मित्र के संग एक ही संस्थान  में काम करता था ,तो दोनों के बिच में बातें होने लगी ! फिर कुछ देर बाद उसने बताया कि उसका जॉब किसी सरकारी कार्यालय में बतौर superwiser  लग गया हैं ! यहां तक तो ठीक था ,मगर आगे जो उसने बताया वो बिचलित करने वाला था ! उसने बड़े ही अभिमान के साथ एक वाकया सुनाया कि कुछ दिन पहले वो बिना हेलमेट के जा रहा था तो ट्रैफिक पुलिस ने उसे रोका ! उसने बताया कि मैं सरकारी  आदमी हूँ आप ऐसे कैसे कर सकते हैं ! ( दरअसल उसने चंद दिन पहले ही ड्यूटी ज्वाइन की थी तो उसके ऊपर गुरुर सवार था कि मुझे कैसे रोक दिया ?) मगर पुलिस ने उसकी एक न सुनते हुए उसकी बाइक को जब्त कर लिया !  उसके बाद वो बड़े ही तपाक  से अपने सीनियर के पास गया और सीनियर ने पुलिस चेकपोस्ट में कॉल करके पुलिस वालों को बहुत बुरा भला सुनाया जो मैं कह भी नही सकता ! और साथ में इंस्ट्रक्शन भी दिया की ऑफिस में आकर बाइक लगा दो , और और ऐसा हुआ भी ! ये सब बातें बताते हुए उसके चेहरे पर अजब सी मुस्कान थी जैसे की उसने कोई जंग जीत ली हो ! अपना इतना गुणगान करने के बाद भी उसका जी नही भरा ( उस समय हमसब उसके कार्यालय के बाहर ही खड़े थे ) , तो सड़क से एक अधेड़ उम्र के शख्स गुजर रहे थे तो उसने बड़े ही अभिमान से उन्हें आवाज दी ! जो उससे उम्र में कम से कम बीस    साल बड़े होंगे ! और वो लड़का हमलोगों से बोला कि ये मेरा जूनियर स्टाफ हैं देखिये कैसे इसकी क्लास लेते हैं ! हम दोनों बंधू अचंभित थे कि आखिर ये साबित क्या करना चाहता हैं ! खैर वो अंकल पहुंचे तो लड़का उनको सुनाने लगा कि अभी तो टाइम नहीं हुआ हैं तो आप कैसे निकल गए ? ( दरअसल उसके पास कोई कारण भी तो नही था सुनाने का ) तो अंकल जीअपराधी स्वभाव से  सबकुछ बताते गए कि आज पहले ही आ गए थे क्यूंकि मुझे जल्दी जाना था ! लड़के को तो बस धौंस दिखाना था  जो हो चुका था ,तो उसने उनको भेज दिया और इंस्ट्रक्शन दिया कि टाइम पर आया कीजिये !
देश बचाओ 
फिर उसने आगे कहा कि मेरे अंदर 20 स्टाफ काम करते हैं ! मेरे अब बर्दास्त से बाहर हो रहा था और वो मेरे मित्र को भी लग रहा था तो हमलोग जल्द ही उससे रुखसत हुए ! 

अब उस लड़के  की   सच्चाई सुनिए जो मेरे मित्र ने मुझे बताई ! वो लड़का अपना एड्रेस भी सही से नहीं लिख सकता ! उसे मेल करना भी नही आता ! जब भी मेल करना या फिर कोई और काम करना होता तो वो मेरे मित्र की सहायता लेता था ! और आज मेरे मित्र स्टडी कर रहे हैं और वो सरकारी नौकरी ! 
दरअसल बात ये हैं कि उसके दो भाई पुलिस बिभाग में बड़े पद पर तैनात हैं इसी वजह से उसको जॉब मिली हैं ! मुझे ऐसे अधिकारीयों पर घिन आती हैं जो अपने बेकार रिलेटिव्स को ऐसे जिम्मेदार पदों पर रखवा देते हैं जिसका मतलब भी उन्हें नही पता होता हैं ! मैं आपलोगों से पूछता हूँ कि अगर कोई पढ़ा लिखा इंसान उसकी जगह होता जिसने अपने मेहनत के बल पर जॉब पायी होती तो क्या कभी ऐसा सुलूक करता ? नहीं करता ! क्यूंकि शिक्षा से सिर्फ ज्ञान की प्राप्ति ही नहीं होती बल्कि सौम्यता और संस्कार की प्राप्ति भी होती हैं ! 
कितनी बिडम्बना की बात हैं की उस पद के लिए हजारों के संख्या में लोग दिन रात एक किये हुए हैं और वो पद एक लम्पट को मिल चूका हैं ! यही सच्चाई हैं हमारे system  की ! 
हम ये न सोचें कि अगर हम सोये हुए हैं तो कोई जगायेगा क्यूंकि  चोरों केलिए  यही तो मौका हैं ! और वैसे भी सोये शेर को जगाया नहीं जाता ! 

Relations that make us

रिश्ते ! हर इंसान के लिए यह शब्द बहुत मायने रखता है ! चाहे वो अमीर हो या गरीब , अच्छा हो या बुरा ! बस फर्क इस बात का होता हैं कि इंसान का रिस्ता किन लोगों से हैं !
कुछ रिश्ते जन्म के साथ -साथ ही बन जाते है जो इंसान को खुद नहीं बनाना होता है ! उस तरह के रिश्ते भगवान् के द्वारा दिया गया पारितोषिक होते हैं और उसमे हमें जो भी मिलता हैं , उसे स्वीकार करना ही होता हैं वहां चुनने की जरुरत भी नहीं होती ,क्योंकि भगवान् हमारे लिए अच्छा ही करते हैं !
कुछ लोग कहते हैं कि रिश्ते भगवान् के घर से बनकर  आते हैं ! पता नहीं वो किन रिश्तों की बात करते हैं ! कहा जाता हैं कि हम कुछ नहीं कर सकते जो भगवान् ने सोच रखा है ,वही होगा !
मैं सोचता हूँ कि कुछ रिश्ते भगवान् के घर से बनकर आते हैं ,लेकिन बाकी हम खुद बनाते है और हमारा जीवन इसी बात पर निर्भर करता है  कि हम किन लोगों के साथ रहते हैं ! माता - पिता ,भाई -बहन , दादा - दादी , नाना -नानी ,   सारे रिश्ते हमारे जन्म के साथ ही बन जाते हैं इसमें हमारा कुछ विशेषाधिकार नहीं होता हैं लेकिन जैसे -जैसे हम बड़े होते हैं तो कुछ रिश्ते खुद ब खुद बन जाते हैं ! और इन्ही रिश्तों में से एक हैं दोस्ती !
अक्सर सभी बच्चों के माता -पिता अपने बच्चों की गलती पर उसके दोस्तों को जिम्मेदार ठहराते हैं कि दोस्तों की वजह से बिगड़ गया हैं ये तो ऐसा था ही नहीं ! जरा सोचने वाली बात हैं कि अगर सभी माता -पिता  दूसरे बच्चों  को जिम्मेदार ठहराते हैं तो बचा कौन ? सभी अगर एक दूसरे पर उंगली उठाते हैं तो ऐसा कौन होगा जिसके तरफ उंगली नहीं होगी !
दरअसल दोस्ती एक पवित्र और सच्चा रिस्ता होता हैं ! जब आप दोस्तों के साथ रहोगे चाहे कितनी भी परेशानी क्यों न हो , आपको उसका एहसास नहीं होगा , दोस्तों के साथ रहने से सारी दुस्वारियां दूर हो जाती हैं !
जब आप किसी भी कारण से भर से दूर हो जाते हैं चाहे पढाई के लिए या फिर नौकरी के लिए ,तब  आपका सारा परिवार पीछे छूट जाता हैं ! उस समय  जिसका सहारा मिलता हैं , वो दोस्त होता हैं ! जब आपके सामने कोई समस्या आती हैं तो वो दोस्त ही होता हैं जो सबसे आगे खड़ा  होता हैं !

Wednesday, 5 April 2017

yesss we can do anything

नमस्कार मित्रगण
आज बहुत दिन कुछ लिखने का मौका मिला हैं क्योंकि रूटीन थोड़ा बहोत व्यस्त हो गया हैं इस वजह से मेरा मन भी नही लग रहा था तो सोचा कि  चलो कुछ किया जाए !
मैं क्या कर सकता हूँ या आप क्या कर सकते हैं , इसकी कोई सिमा नही हैं ! इस दुनिया मैं इस कुछ भी नही हैं जो हम नही कर सकते हैं ! क्योंकि चंद  प्राकृतिक चीजों को छोड़कर जो कुछ भी इस संसार में हैं ,  वो सब मनुष्य के द्वारा ही निर्मित हैं ! मैं ये भी नही कहता कि सारी चीजें कुछ ही बरसों में निर्मित हो गयी और उसे  सिर्फ एक या कुछ लोगों के समूह ने मिलकर बना दिया ! ये सब हुआ हैं मानवजाति  की बरसों की मेहनत के उपरांत !
आज तक इस धरती पर कई पीढियां हुई और सभी से जो बन पड़ा , वो योगदान इस संसार को मिला ! अगर इस नही हुआ होता तो आज के संसार और 50000 साल पहले के संसार में कोई अंतर नही रह जाता ! धीरे धीरे मगर निरंतर प्रयासों के कारण ही हम आज की सुविधापूर्ण दुनिया में साँस ले पा रहे हैं ! 
दोस्तों , हम भी इस संसार के ऋणी हैं क्योंकि  यहां हमे जीवन मिला हैं और जो जीवन दे वो तो पूजनीय हैं ! तो हमारा भी फर्ज बनता हैं कि इस संसार को कुछ देकर जाएँ ताकि  इसकी रचना में थोड़ी ही हिस्सेदारी हमारी भी हो ! क्योंकि हमें तो बहुत कुछ मिला हैं संसार से , अब थोड़ा तो  हम भी कर ही सकते हैं !
अगर हम ये सोचें कि हमें क्या लेना इस सबसे ! ये सिर्फ सामाजिक लोगों का काम हैं , हमें फुरसत कहाँ हैं ? तो मैं बता दूँ कि जिस दिन नेपोलियन का जन्म हुआ होगा , उस दिन और भी बहुत सारे लोगों ने जन्म लिया होगा ! मगर हम सिर्फ नेपोलियन को जानते हैं ! क्यूँ ? क्या भगवन ने उसे कुछ और ही नाक नक्स दिया था या फिर उसके दो से अधिक हाथ पावँ थे ? या फिर उसे कोई दैविक शक्ति प्राप्त थी ?  
ये बात आप भी जानते हैं कि जो बातें मैंने ऊपर कहीं हैं इस में कुछ भी बिशेष नही था ! बिशेष बात ये हैं कि नेपोलियन ने अपने जीवन मैं ऐसा  काम कर दिया था कि उसे भुलाया ही नही जाया सकता ! उसने अपना पूरा जीवन अपने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था !  बात सिर्फ नेपोलियन की ही नही हैं ! बात हैं उन सब महान सख्शियतों जिनका नाम  बड़े आदर और गर्व से लेते हैं ! जरुरी नही कि सबकुछ छोड़कर सामाजिक कार्यों में लग जाएँ ! ये भी सही नही हैं ! क्योंकि आपके कुछ अपने भी होतें हैं जिन्हें आपसे बहुत उम्मीद होती हैं ! मेरी सोच ये हैं कि जिस क्षेत्र  में रहें उसी में अपना सर्वश्रेष्ठ दें ! ताकि लोग आपके बाद भी आपका नाम और काम नही भूल सकें ! 
हम जब भी कभी रेलवे स्टेशन , सड़क , फुटपाथ  और ऐसी कुछ जगहों पर असहाय लोगों को देखते हैं तो तकलीफ होती हैं ! खासकर बच्चों को देखकर किसका दिल नही पसीजता होगा ! वो जूठे बर्तनों में भी आशा की नज़रों से देखते हैं कि शायद कुछ मिल जाये !  दुर्भाग्यवश उन्हें कुछ भी नही मिलता ! मैं पूछता हूँ कि  क्या वो देश के नागरिक नही हैं ? उन्हें खाने के लिए भी कुछ नही मिल सकता ? सरकार की योजनाएं सिर्फ बाकि लोगों के लिए ही होती हैं ? 
मैंने जब अपने एक मित्र से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया  की योजनाएं तो बनती हैं और पैसा भी आवंटित हो जाता हैं लेकिन उसे अपने द्वारा बनाये गए चैरिटी में चुपके से भेज दिया जाता हैं!  कुछ लोग मजबूर के हक़ को भी छीन लेते हैं ! 
मेरे कहने का उद्देश्य ये था कि अगर हम सावधान हो जाएँ तो कौन उनका हक छीन सकता हैं ?  ऐसा कौन सा काम हैं जो हम नही कर सकते हैं ! बस जब तक अपने लक्ष्य को पाने में सफल न हो जाएँ , तब तक ऐसे लोगों से दूर हो जाएँ जो आपसे ये कहें , कि  तुम यह नही कर सकते ! 
              चलोगे तो रोकने वाले मिलेंगे 
              रुकोगे तो टोकने वाले मिलेंगे
           

My Views About God

इंसान जन्म लेता हैं और एक निश्चित अवधि पूरी करने के बाद मृत्यु को प्राप्त होता हैं ! इस बीच वो जो वक्त होता हैं वो कर्त्तव्य पालन का होता ह...