Friday, 12 January 2018

My Views About God

इंसान जन्म लेता हैं और एक निश्चित अवधि पूरी करने के बाद मृत्यु को प्राप्त होता हैं ! इस बीच वो जो वक्त होता हैं वो कर्त्तव्य पालन का होता हैं ! अब यह व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक इंसान पर निर्भर करता हैं कि वो अपने कर्त्तव्य के प्रति कितना निष्ठावान हैं ! 
महान अंग्रेज कवि एवं विचारक शेक्सपियर के शब्दों में , ये दुनियां एक मंच की तरह हैं जहाँ हम सब किरदार मात्र हैं ! जिस तरह कलाकार मंच पर अपनी कलाकारी दिखाकर फिर से वापस चला जाता हैं , ठीक उसी तरह हम इंसान भी जन्म लेते हैं , अपना किरदार निभाते हैं और फिर चले जाते हैं ! 
दोस्तों ! आज इंसान ने बहुत तरक्की कर ली हैं ! हम पांच दशक पहले ही चाँद पर अपना पहला कदम रख चुके हैं , मंगल हमारी नजरों से अछूता नहीं हैं। , फलतः अंतरिक्ष के क्षेत्र में हमने अपनी क्षमता विकसित की हैं ! हमने कई ग्रहों और उपग्रहों की कक्षाओं में मानवनिर्मित उपग्रह भेजे हैं , जो कि सफलतापूर्वक काम भी कर रहे हैं और हमे महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा कर रहे हैं जिससे जीवन जीना आसान हो गया हैं ! ठीक उसी तरह शिक्षा , स्वास्थ  और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में भी हमने अभूतपूर्व सफलता अर्जित की हैं !
अब हम सिक्के के दूसरे पहलु को देखते हैं ! क्या हम लोगों में साँस को नियत्रित कर सकते हैं ? , क्या हम सूर्य की की गति को नियंत्रित कर सकते हैं ? क्या चन्द्रमा से कह सकते हैं कि ख़बरदार जो आज रात दिखाई दिए तो ! क्या हम पृथ्वी  घूर्णन गति को प्रभावित कर सकते हैं ? क्या पृथ्वी की गुरुत्व शक्ति ख़त्म कर सकते हैं ? 
आप सबने लगभग ना में उत्तर दिया होगा ! अब मैं कहता हूँ क्यों नहीं ?? हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते ?? और अगर हम ये सब नहीं करते तो फिर कौन करता हैं ? एक छोटे से फैक्ट्री को चलने के लिए CEO की जरुरत होती हैं , स्कूल को चलाने के लिए प्रधानाध्यापक की जरूरत होती हैं ,बैंक में बैंक मैनेजर होते हैं और देश में राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री ! तो आप ये उम्मीद भी कैसी कर सकते हैं कि ये सिस्टम, जिसमे करोड़ो ग्रह , उपग्रह , तारे , मन्दाकिरियाँ हैं , वो ब्रह्माण्ड अपने आप चलता होगा ? उसका कोई नियंत्रक नहीं ? 
प्रख्यात भौतिक विज्ञानी सर आइजक न्यूटन ने भी उस शक्ति की सत्ता स्वीकार की थी और उन्होंने कहा भी था " करोड़ो सौर मंडल के सभी गृह सूर्य की परिक्रमा करते हैं , उपग्रह ग्रहों की परिक्रमा करते हैं।  लेकिन कोई भी एक दूसरे से नहीं टकराता ! कोई भी अपना रास्ता नहीं बदलता" ! आप सोचिये कि अगर पृथ्वी अपना पथ छोड़कर सूर्य के जरा सी निकट पहुँच जाये तो क्या होगा ? लेकिन ऐसा नहीं होता हैं ! 
न्यूटन ने इसके पीछे गुरुत्वाकर्षण को माना कि सभी खगोलीय पिंड गुरुत्व शक्ति से एक दूसरे को खींचे हुए हैं जिससे सबमें संतुलन बना हुआ हैं और इसी वजह से कोई भी अपने मार्ग से नहीं भटकता ! 
अब न्यूटन फिर कहते हैं कि हां ये सच हैं कि ये गुरुत्वाकर्षण की शक्ति के कारण संभव हैं , लेकिन ये शक्ति आयी कहाँ से ?? आपने कभी बिना मालिक के घर , कार , फैक्ट्री या फिर बिना नेतृत्व के देश के बारे में सुना हैं ?
नही ! 
अब निष्कर्ष ये कहता हैं कि कोई शक्ति हम सब से ऊपर हैं जो इन सब चीजों को बिना भेदभाव के नियंत्रित करती हैं उसके लिए सब बराबर हैं इसलिए सूर्य की किरण किसी से भेदभाव नहीं करती ! वो शक्ति ब्रह्माण्ड की सारी जीवित वस्तृओं के सांसो को नियंत्रित करती हैं  आप उसे कुछ भी नाम दे सकते हैं लेकिन वो अदृश्य हैं !
उसका कोई आकार नहीं हैं ! उस शक्ति को अलग अलग लोग अलग अलग नामों से जानते हैं ! 
वो कभी नहीं कहता कि तुम कर्म नहीं करोगे तो भी तुम्हे सफलता मिल जाएगी ! हम कर्म करेंगे तो उसका प्रतिफल मिलेगा ही ! 
ईश्वर के प्रति विश्वास हमें मजबूत रखता हैं फिर जब भी हम कर्म करते हैं तो विश्वास और  कर्म का ये गठजोड़ हमें सफल बनता हैं और हम प्रसनत्ता महसूस करते हैं ! 
ईश्वर के प्रीति विश्वास दुनिया के हर धर्म के लोगों में हैं और होनी भी चाहिए ! हिन्दू , मुस्लिम , सिख्ख , ईसाई  ,यहूदी सभी उसकी सत्ता को स्वीकार करते हैं लेकिन बस नाम अलग हैं ! बौद्ध और जैन ईश्वर को नहीं मानते लेकिन उस शक्ति को जरूर मानते हैं जो बस हैं ! 

                                                                                                                          धन्यवाद 








Wednesday, 10 January 2018

Emergency Due To Global Warming

ये निवेदन हैं कि बस पांच मिनट निकालकर इसे पढ़ें क्यूंकि ये आपके लिए ही है! 

आज दुनियां ग्लोबल वार्मिंग को निहायत ही बड़े तौर पर झेल रही हैं ! फिर चाहे वो उत्तराखंड की बाढ़ हो , नेपाल का भूकंप हो , अमेरिका में आये हुए तूफान हो  या फिर जापान में आयी हुई सुनामी हो ! हम पाएंगे कि प्रकृति हमसे खुश नहीं हैं और उसका खामियाजा हमे भुगतना पर रहा हैं और आगे भी भुगतना पर सकता हैं अगर हम कोई ठोस कदम नही उठाएं तो !
अभी के समय में एक ही धरती पर , एक ही मौसम में दो अलग अलग जगहों की स्थीति बिलकुल ही भिन्न हैं ! अभी अमेरिका वर्तमान समय की सबसे कड़ाके की ठंढ से जूझ रहा हैं तो वही ऑस्ट्रेलिया भीषण गर्मी से ! ये चीजें इशारा करती हैं कि प्रकृति निश्चित रूप से ही हमसे रूठी हुई हैं और हमारा दायित्व बनता हैं कि इसे मनाएं ! ये कोई उपकार नही होगा जो हम प्रकृति के ऊपर करेंगे बल्कि ये मानवजाति को बचाने के लिहाज से आवश्यक हैं ताकि हमारी पीढ़ियां सुरक्षित रहे !
सहारा का मैदान अपनी भीषण गर्मी के लिए प्रख्यात हैं ! वह नमी नाम की किसी चीज की गुंजाइश भी नहीं की जा सकती लेकिन ताजा खबर ये हैं कि वहां पर बर्फवारी हुई हैं ! अब इसे हम क्या कहेंगे ? ये सारी की सारी चीजें ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हो रही हैं ! कुछ वर्षों में कई रहने योग्य जगहें जीवन के लिए अनुपयुक्त हो जाएगी और फिर कुछ ऐसी जगहें जो अभी बिलकुल ही जीने के लिहाज से उपयुक्त नहीं हैं , वही लोगों के रहने लायक हो जाएगी ! 
हम वन को नहीं बचा पा रहे इससे लगातार वायुमंडल का तापमान बढ़ता जा रहा हैं साथ साथ एयर कंडीशनिंग से निकलने वाली CFC की वजह से ओजोन लेयर को भारी नुकसान झेलना पर रहा हैं जिससे तापमान में बृद्धि हुई हैं लेकिन इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं हैं कि हम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना छोड़ दें ! तापमान में बृद्धि होने से ग्लेशियर ज्यादा तेजी से पिघल रहे हैं !ग्लेशियर के ज्यादा पिघलने से समुन्द्र का जलस्तर बहुत ही तेजी से बढ़ रहा हैं जो कई शहरों को अपने आगोश में ले लेगी जो समुद्र तट पर हैं !
अब प्रकृति ने हमारे लिए खतरे की घंटी बजा दी हैं और वो हमे बार बार सावधान कर रही हैं ! हम प्रकृति को बाद में दोष नहीं दे सकते क्योंकि उसने तो हमे बार बार आगाह किया हैं ! 
अतः अब हमे सोचना ही होगा ! ये अनिवार्य शर्त हैं अगर हम पृथ्वी पर जीवन को बचाना चाहते हैं ! अन्यथा वो दिन दूर नहीं जब ये एक कहानी बन जाएंगी की बहुत साल पृथ्वी नाम के एक गृह पर जीवन संभव था और किसी ग्रह के प्राणी यहां आकर रीसर्च करें कि देखो शायद यह पानी के निशान मिल जाएँ जैसा कि हम अभी मंगल और चन्द्रमा के सन्दर्भ में करते हैं ! उस समय न नील होगी  न गंगा , अमेजन होगी न राइन !
अब सोचो की क्या पृथ्वी को भी इतिहास बनाना हैं या इसे जिवंत रखना हैं !

Friday, 5 January 2018

Indian Education System

आज का शीर्षक बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हैं क्योंकि शिक्षा किसी भी देश के विकास की नींव होती हैं ! हमें आजादी मिले सत्तर बर्ष से अधिक हो चुके हैं मगर हमारी शिक्षा व्यवस्था अभी भी दोषपूर्ण हैं और इसे सुधारने के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं !
इन्हें मुस्कुराने दो !
सबसे पहले मैं प्राथमिक स्तर की शिक्षा व्यवस्था के ऊपर प्रकाश डालना चाहूंगा ! हमारी सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत आठवीं तक के सभी बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने की व्यवस्था की हैं लेकिन इसमें कुछ कमियां हैं ! मैंने कई सरकारी विद्यालय देखे हैं जिसमे पढाई तो प्रथम से अष्टम वर्ग तक के बच्चों की होती हैं लेकिन उसमे शिक्षकों की संख्या प्रधानाध्यापक सहित केवल पांच हैं ! अब ये बात हजम नही हो रही हैं कि आठ वर्ग पांच शिक्षकों के द्वारा सुचारु रूप से संचालित  होते होंगे !अगर एक वक्त में पांचों शिक्षक पांच वर्ग में हों तो बाकि के तीन वर्ग कैसे संचालित होते होंगे ? यही स्थिति कमोबेश सभी सरकारी संस्थानों की हैं फिर चाहे वो प्राथमिक , मध्य या उच्च शिक्षण संसथान हों ! हमारे संस्थान शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं !
हम आज विकसित राष्ट्र का सपना देख रहे हैं और देखे भी क्यों नहीं ? हमारे पास सारे  संसाधन हैं , युवाओं की फ़ौज हैं , तो अगर हम विकसित होने का सपना नहीं देख सकते तो और कौन देखेगा ? लेकिन हमे समझना होगा कि हम इस अनमोल युवा संसाधन को किस दिशा में मोड़ रहे हैं  उनकी शक्तियां किस प्रयोजन के लिए खर्च हो रही हैं !
हमें practical study पर ज्यादा जोड़ देना होगा वजाय theoretical study
के ! छोटे से बच्चे के ऊपर दस दस विषय का बोझ दे दिया जाता हैं ! अब जो बच्चा डॉक्टर बनना चाहता हैं उसे हिंदी पढ़ने की क्या जरुरत ? जो बच्चा लेखक बनना चाहता हैं उसे गणित पढ़ने की क्या जरूरत ? क्या हम उनकी ऊर्जा को बर्बाद नहीं कर रहे हैं ? और ऐसा भी नहीं कि ये सारे अनैच्छिक विषय उसे दो या तीन बर्षों तक पढ़ने होते हैं बल्कि ये उन्हें बहुत दिनों तक पढ़ना होता हैं !
अगर हम बच्चों के ऊपर से बहुत सारे बिषयों के बोझ हटाकर सिर्फ उसके काम से बिषय उसे पढ़ने दें जो वाकई में उसे पढ़ना हैं तो वो अपनी पूरी ऊर्जा अपने उस इच्छित कार्य पर व्यय करेगा  और भविष्य में कुछ अद्भुत करेगा !

My Views About God

इंसान जन्म लेता हैं और एक निश्चित अवधि पूरी करने के बाद मृत्यु को प्राप्त होता हैं ! इस बीच वो जो वक्त होता हैं वो कर्त्तव्य पालन का होता ह...