Sunday, 10 September 2017

WOMEN LIVES BECAME HELL NOW A DAYS

कल मैंने एक NEWS पढ़ी थी ! कि झारखण्ड के दुमका जिले में एक लड़की के साथ लगभग 20 लोगों ने RAPE किया और उनमे सबकी AGE 18 से 22 के बीच थी ! एक और न्यूज़ आई हैं कि स्कूल के गार्ड ने एक पांच साल की बच्ची के साथ RAPE किया !वो गार्ड ,जिसकी उम्र 37 साल हैं और वो एक पिता भी हैं ! ऐसी ना जाने कितनी ख़बरें अख़बारों में रोज मिलती हैं ! और कई तो अख़बार में भी नहीं आ पाती !और कोई ठोस कदम उठाने की जगह हम बस निंदा कर देते हैं कि ये तो बहुत गलत हुआ हैं  ! ज्यादा होगा तो मोर्चा निकाल देंगे  और महिला दिवस पर लम्बा चौरा भाषण भी दे देंगे क्यूंकि उसकी कला तो हम सभी रखते हैं !!
हम भारतीयों के साथ एक बड़ी बिडम्बना हैं कि आग जब अपने घर तक नही पहुँचती हैं तब तक हम कोई मतलब नहीं रखते हैं ! पड़ोस का घर जल रहा होता हैं और हम बस इस इंतजार में रहते हैं कि जब आग मेरे घर के करीब आएगी तो देखा जाएगा  ! माफ़ कीजिएगा लेकिन ये हमारी सबसे बड़ी मुर्खता हैं ! हमारी सोच ये होनी चाहिए कि अगर पड़ोस में आग लगी हो तो सभी लोग मिलकर उसे बुझायें ताकि वो आग फिर किसी के लिए खतरा नही बन सके !दोस्तों ! आज ऐसी ही आग लगी हुई हैं ! जिसे हम सबको एकसाथ आकर बुझाना होगा !
इस तरह की हैवानियत के लिए सरकार से ज्यादा उपयोगी हम youth हो सकते हैं ! क्यूंकि अगर कोई भी परिवर्तन होता हैं तो वो युवाओं के बल पर ही होता हैं ! अगर हम सब ठान लें तो हमारे देश में एक भी rape नही होगा और ये हमारी बहुत बड़ी कामयाबी होगी ! कुछ ऐसा करते हैं कि हैवानियत से इंसानियत की तरफ एक कदम बढे और हमारा देश और भी गौरवशाली हो जाये !
एक बार दिमाग पर जोर दें कि देश की आधी आबादी को जिल्लत की जिंदगी देकर हम बिकसित राष्ट्र का सपना कैसे देख सकते हैं ? अगर हमारे देश की लड़कियां और महिलाएं डरी - सहमी हुई रहेगी तो हम बच्चों में साहस कहाँ से ला पाएंगे ?
दोस्तों ! आज से मैं एक mission पर चल पड़ा हूँ और मुझे इसमें आप सबका साथ चाहिए ! जिससे की इस घिनौनी सोच को हम समाज से निकल फेंके ! इसके लिए हमें कुछ कदम उठाने होंगे जिसमे कुछ निम्नलिखित हैं और बाकी आपसब कुछ नया तरीका खोज सकते हैं जो कि काफी effective हो !
1. अगर आप अभिभावक हैं तो अपने बच्चों को नैतिकता के बारें में भी कुछ बताएं ! सिर्फ किताबी ज्ञान ही काफी नही होता ! please !!!
2. अगर आप युवा हैं तो खुद से एक promise करें कि मैं ये घिनौनी हरकत कभी नही करूँगा और अगर कोई एसा करने को हाथ आगे करे तो उसके हाथ भी जरुर काटूँगा !
३. हर युवा जिनकी शादी नही हुई हैं वो अपने आप से promise करें कि अपने बच्चों को बचपन से ही सही गलत में फर्क करना सिखाएँगे ताकि वो बर्बाद ना हो सकें !
4 . हर सख्स इस बिषय पर अपने दोस्तों से चर्चा करें और कोशिश करें कि ये सोच देश के हर युवा तक पहुँच जाये और हम जल्दी से इस समस्या से निजात प् लें ताकि हम भारतीय अपना पूरा फोकस देश की बाकी समस्याओं पर कर सकें !
5 . इसका राजनीतिकरण ना हो ! ये एक सामाजिक कुरीति हैं और शुरुआत में कुछ समस्याएँ भी आएँगी मगर याद रहे कि कोई भी बड़ा परिवर्तन आसानी से नहीं होता ! हमने सती प्रथा जैसी कुरीति को भी ख़त्म किया हैं ! तो हमारा इतिहास भी हमारी शक्तियों का गवाह हैं !

गलियों से चीखती क्यूँ दहशतें ,
इंसानियत ले रही करवटें .
गिर रहे ज्यादा ,संभल कम रहे !
ये कैसी दुनिया में , हम जी रहे !

be positive friends , yes we can .

Wednesday, 7 June 2017

परेशानियाँ मुझे तोड़ नही सकती ,बस झकझोर सकती हैं !

अगर राहें मंजिल नही मिले तो समझ लो कि आप की चाहत में कमी थी वरना अगर पूरी ईमानदारी से प्रयास किया जाये , तो संसार में ऐसा कुछ भी नही जो हासिल नही किया जा सके ! सबकुछ संभव हैं ! बस दिल से उसे चाहो तो सही !
मैं कुछ दिनों से blogger से दूर था लेकिन इसका मलाल मुझे हमेशा रहता था ! जी करता था कि चलो आज तो कुछ लिख ही देते हैं लेकिन कुछ परेशानियाँ थी जिस वजह से मैं भी मजबूर था ! पर कोई नही दोस्तों ! मैं लौट आया हूँ और पहले से भी ज्यादा उत्साह और उर्जा के साथ ! जो किअनंत हैं सागर के लहरों की तरह !
यज्ञ ! ये नाम सुना सुना लगता हैं क्यूंकि हमारी संस्कृति में ये शब्द बहुत मायने रखता हैं  और जितनी पुरानी हमारी आर्य संस्कृति हैं , उतना ही पुराना यज्ञ का औचित्य हैं ! यज्ञ आखिर होता क्या हैं ? हमारे वेदों में भी बिभिन्न प्रकार के यज्ञों का वर्णन हैं ! अलग अलग उद्देश्य की प्राप्ति के लिए भिन्न भिन्न प्रकार के यज्ञ का बिधान हैं !
आप आपलोग सोच रहे होंगे कि मैं अचानक ये बातें क्यूँ कर रहा ! इससे हमारे क्या ताल्लुकात हैं ? तो मैं आपको बता दूं , कि सबसे ज्यादा ताल्लुकात हमलोगों को ही होनी चाहिए ! हमारी नई पीढ़ी इस बात को समझ ले और आज के ब्लॉग को आत्मसात कर ले तो दुनिया इतनी खुबसूरत हो सकती हैं कि मरनेवाला भी मौत को कुछ देर ये कहकर टाल्नें की कोशिश करेगा कि थोरा सब्र कर ! अभी मुझे और दुनिया देखनी हैं !
आप अपने जीवन को यज्ञ बना लें और जब इसमें प्रतिदिन अपनी मेहनत रूपी आहुतियाँ देंगे तो इसका प्रतिफुल अवश्य मिलेगा ! पहले आप ये सोचो कि आपको चाहिए क्या ! और उसके लिए पूरी सिद्दत से समर्पित हो जाओ ! हर यज्ञ का फल मिलता हैं अगर वो बिधि बिधान से किया जाये तो इस जीवन रूपी यज्ञ का फल क्यूँ नही मिलेगा ? बस आप आहुतियाँ देने में कंजूसी नही करें ! यहाँ आपको आहुतियाँ भी कुछ खास देनी होगी ! सबसे मुख्य चीज कि आप अपना एक एक पल इसमें झोंक दें कुछ और देखें ही नही! नींद , आलस , अकर्मण्यता , भूख , प्यास ! इन सब चीजों की आहुतियाँ चाहिए ! क्या आप दे पाएंगे ? क्या आप में वो  बात हैं जो आप इन चीजों को त्याग सकते हैं ? और अगर हैं तो दुनिया की सारी शक्तियां आपको सफल होने में मदद करेगी ! क्यूंकि भगवान् उसी की मदद करते हैं जो खुद की मदद करते हैं और आपने ये भी सुना होगा की  किस्मत सिर्फ और सिर्फ बहादुरों का साथ देती हैं ! तो देर कैसी ? यहाँ में स्वामी विवेकानंद जी की पंतियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ ! उन्होंने

युवाओं से आह्वान किया था - हे युवाओं ! उठो ! और तब तक नही रुको , जब तक की लक्ष की प्राप्ति ना हो जाये !  केवल आप ही अपने आप को साबित कर सकते हैं ! तो रुके क्यूँ हो ? बनाओ अपने जीवन को यज्ञ ! दो उसमे आहुतियाँ समय की ! और पा लो वो सब , जिसके तुम हक़दार हो !
                                                                                                               जय श्री राम 

Saturday, 29 April 2017

                        कभी न रुकना चलते जाना
                         भीड़ बहुत तेरे गलियारे 
                         लगते होंगे अपने सारे 
                         खोज सको तो, खोज लो रही 
                           कस्ती के हैं कौन सहारे 
                                                              अगर किनारा न मिल पाए 
                                                              कहीं दूर तट नजर न आये 
                                                               नाव तभी भी खेते जाना 
                                                              कभी न  रूकना चलते जाना 
                       कुछ लोग तुम्हे मिल जायेंगे 
                       जीवन भर साथ निभाएंगे 
                        दर्द तुम्हे, महसूस उसे ,
                        पर, दर्द नहीं दिखलाएंगे 
                                                                वो लोग न तुम से रूठेंगे 
                                                                चाहे बाकी सब छूटेंगे 
                                                                बस उन्हें छोड़कर मत जाना 
                                                                फिर कभी न रुकना चलते जाना 


Thursday, 20 April 2017

Our Traffic System And Role Of People In This

नमस्कार
मैं ऐसे ही मुद्दों को उठता हूँ जो हमारे समाज और लोगों को प्रभावित करते हैं  और जिससे हमारे समाज , राज्य , देश और संसार का कल्याण हो !
मैं आज बात कर रहा हूँ अपने ट्रैफिक सिस्टम की ! क्यूंकि हम सब जानते हैं कि ये आज कितनी बड़ी समस्या बन चुकी हैं ! रोज हजारों लोग सिर्फ इसकी वजह से  अपने प्राणों  से हाथ धो बैठते हैं क्यूंकि जाम के कारण वो सही समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाते हैं ! हम सड़क से चलते हैं तो अनायास ही कई एम्बुलैस जाम में फंसे हुए नजर आते हैं ! हमे तो इससे ज्यादा फर्क नहीं परता क्यूंकि वो हमारे करीबी नहीं होते हैं लेकिन आपको अगर सच्चाई जाननी हो तो  उस मरीज के साथ बैठे परिजनों की आँखों में झाँकने की कोशिश कीजिये ! आपको सब नजर आ जायेगा ! वो डबडबाई आँखों से ट्रैफिक सही होने का इंतजार करते रहते हैं आंखे बंद करके भगवान् से प्रार्थना करते रहते हैं कि  ट्रैफिक सही हो जाये लेकिन उन्हें ये ख्याल नहीं रहता कि ये समस्याएं तो मानव निर्मित हैं इसमें भगवान् क्या कर सकते हैं !
ट्रैफिक जाम के लिए हम भी कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं ! मैं आपको वाकया बताता हूँ कि जब भी मैं कहीं पैदल जा रहा होता हूँ तो चौराहों पर ट्रैफिक कहीं कहीं रुका हुआ मिलता हैं क्यूंकि एक तरफ की गाड़ियां पास हों तभी तो दूसरी तरफ की होंगी ! तो मैं भी इन्तजार करता रहता हूँ कि गाड़ियां पास हो जाये उसके बाद उस पार चला जाये !  आपको बता दूँ कि मेरे साथ अगर  10 लोग खड़े हों तो उसमे से 8 वहां रुकना नहीं चाहते और तेज रफ़्तार गाड़ियों के बिच दौर परते हैं अधेड़ उम्र के लोग भी बच्चों जैसा बर्ताव करते हैं मजबूरन कुछ गाड़ियां धीमी हो जाती हैं जिससे ट्रैफिक बहुत हद तक प्रभावित होता हैं ! आप ही सोचिये कि अगर दो  मिनट इंतजार कर लिया जाये तो कौन सा मोदी जी का भाषण छूटा  जा रहा होता हैं ! अगर समाज के लिए नहीं तो कम से कम अपने और अपने परिवार के बिषय में तो सोचना चाहिए ! नहीं तो क्या भरोसा हैं कि सभी गाड़ियां धीमी हो ही जाएगी ! और उस स्थिति में उसपर कोई आरोप भी नहीं लग सकता हैं क्योंकि नियम तो आप ही ने तोड़ा था न !
हमे ट्रैफिक सिस्टम को सुचारु रूप से चलने में मदद करनी ही चाहिए क्योंकि ये किसी और की नहीं ,हमारी खुद की ही मदद हैं !
आज कई जगह ट्रैफिक बत्तियों से कण्ट्रोल होने लगा हैं ! लेकिन फिर भी पुलिस की ड्यूटी जस की तस हैं क्यूंकि अब ट्रैफिक लाइट से भी रूल को follow करवाने के लिए पुलिस चाहिए क्यूंकि लोग लाइट को भी नहीं मानते हैं और नियम तोड़ देते हैं ! मैं समझता हूँ कि जब तक हमे खुद जिम्मेदारियों का एहसास नही होगा तब तक सरकार कुछ भी कर ले , मगर ज्यादा कुछ बदलने वाला नहीं हैं ! हमे खुद भी समझना होगा और लोगों को भी जागरूक करना होगा ! तभी हम इस जाम रूपी दानव से छुटकारा पा सकते हैं जो रोज जिंदगियां लील रहा हैं !
और आप यकीन मानिये की अगर हम सही हो जाएँ तो एक बेहतर समाज की रचना को कोई नहीं रोक सकता !

Monday, 17 April 2017

Truth Of Our System


 कुछ दिन पहले मैं एक आदमी से मिला था  जो कि मेरे एक मित्र का मित्र था ! तो बहुत दिनों के बाद दोनों की मुलाकात हुई थी ,तो वो आपस में बात करने लगे ! वो आदमी मेरे मित्र के संग एक ही संस्थान  में काम करता था ,तो दोनों के बिच में बातें होने लगी ! फिर कुछ देर बाद उसने बताया कि उसका जॉब किसी सरकारी कार्यालय में बतौर superwiser  लग गया हैं ! यहां तक तो ठीक था ,मगर आगे जो उसने बताया वो बिचलित करने वाला था ! उसने बड़े ही अभिमान के साथ एक वाकया सुनाया कि कुछ दिन पहले वो बिना हेलमेट के जा रहा था तो ट्रैफिक पुलिस ने उसे रोका ! उसने बताया कि मैं सरकारी  आदमी हूँ आप ऐसे कैसे कर सकते हैं ! ( दरअसल उसने चंद दिन पहले ही ड्यूटी ज्वाइन की थी तो उसके ऊपर गुरुर सवार था कि मुझे कैसे रोक दिया ?) मगर पुलिस ने उसकी एक न सुनते हुए उसकी बाइक को जब्त कर लिया !  उसके बाद वो बड़े ही तपाक  से अपने सीनियर के पास गया और सीनियर ने पुलिस चेकपोस्ट में कॉल करके पुलिस वालों को बहुत बुरा भला सुनाया जो मैं कह भी नही सकता ! और साथ में इंस्ट्रक्शन भी दिया की ऑफिस में आकर बाइक लगा दो , और और ऐसा हुआ भी ! ये सब बातें बताते हुए उसके चेहरे पर अजब सी मुस्कान थी जैसे की उसने कोई जंग जीत ली हो ! अपना इतना गुणगान करने के बाद भी उसका जी नही भरा ( उस समय हमसब उसके कार्यालय के बाहर ही खड़े थे ) , तो सड़क से एक अधेड़ उम्र के शख्स गुजर रहे थे तो उसने बड़े ही अभिमान से उन्हें आवाज दी ! जो उससे उम्र में कम से कम बीस    साल बड़े होंगे ! और वो लड़का हमलोगों से बोला कि ये मेरा जूनियर स्टाफ हैं देखिये कैसे इसकी क्लास लेते हैं ! हम दोनों बंधू अचंभित थे कि आखिर ये साबित क्या करना चाहता हैं ! खैर वो अंकल पहुंचे तो लड़का उनको सुनाने लगा कि अभी तो टाइम नहीं हुआ हैं तो आप कैसे निकल गए ? ( दरअसल उसके पास कोई कारण भी तो नही था सुनाने का ) तो अंकल जीअपराधी स्वभाव से  सबकुछ बताते गए कि आज पहले ही आ गए थे क्यूंकि मुझे जल्दी जाना था ! लड़के को तो बस धौंस दिखाना था  जो हो चुका था ,तो उसने उनको भेज दिया और इंस्ट्रक्शन दिया कि टाइम पर आया कीजिये !
देश बचाओ 
फिर उसने आगे कहा कि मेरे अंदर 20 स्टाफ काम करते हैं ! मेरे अब बर्दास्त से बाहर हो रहा था और वो मेरे मित्र को भी लग रहा था तो हमलोग जल्द ही उससे रुखसत हुए ! 

अब उस लड़के  की   सच्चाई सुनिए जो मेरे मित्र ने मुझे बताई ! वो लड़का अपना एड्रेस भी सही से नहीं लिख सकता ! उसे मेल करना भी नही आता ! जब भी मेल करना या फिर कोई और काम करना होता तो वो मेरे मित्र की सहायता लेता था ! और आज मेरे मित्र स्टडी कर रहे हैं और वो सरकारी नौकरी ! 
दरअसल बात ये हैं कि उसके दो भाई पुलिस बिभाग में बड़े पद पर तैनात हैं इसी वजह से उसको जॉब मिली हैं ! मुझे ऐसे अधिकारीयों पर घिन आती हैं जो अपने बेकार रिलेटिव्स को ऐसे जिम्मेदार पदों पर रखवा देते हैं जिसका मतलब भी उन्हें नही पता होता हैं ! मैं आपलोगों से पूछता हूँ कि अगर कोई पढ़ा लिखा इंसान उसकी जगह होता जिसने अपने मेहनत के बल पर जॉब पायी होती तो क्या कभी ऐसा सुलूक करता ? नहीं करता ! क्यूंकि शिक्षा से सिर्फ ज्ञान की प्राप्ति ही नहीं होती बल्कि सौम्यता और संस्कार की प्राप्ति भी होती हैं ! 
कितनी बिडम्बना की बात हैं की उस पद के लिए हजारों के संख्या में लोग दिन रात एक किये हुए हैं और वो पद एक लम्पट को मिल चूका हैं ! यही सच्चाई हैं हमारे system  की ! 
हम ये न सोचें कि अगर हम सोये हुए हैं तो कोई जगायेगा क्यूंकि  चोरों केलिए  यही तो मौका हैं ! और वैसे भी सोये शेर को जगाया नहीं जाता ! 

Relations that make us

रिश्ते ! हर इंसान के लिए यह शब्द बहुत मायने रखता है ! चाहे वो अमीर हो या गरीब , अच्छा हो या बुरा ! बस फर्क इस बात का होता हैं कि इंसान का रिस्ता किन लोगों से हैं !
कुछ रिश्ते जन्म के साथ -साथ ही बन जाते है जो इंसान को खुद नहीं बनाना होता है ! उस तरह के रिश्ते भगवान् के द्वारा दिया गया पारितोषिक होते हैं और उसमे हमें जो भी मिलता हैं , उसे स्वीकार करना ही होता हैं वहां चुनने की जरुरत भी नहीं होती ,क्योंकि भगवान् हमारे लिए अच्छा ही करते हैं !
कुछ लोग कहते हैं कि रिश्ते भगवान् के घर से बनकर  आते हैं ! पता नहीं वो किन रिश्तों की बात करते हैं ! कहा जाता हैं कि हम कुछ नहीं कर सकते जो भगवान् ने सोच रखा है ,वही होगा !
मैं सोचता हूँ कि कुछ रिश्ते भगवान् के घर से बनकर आते हैं ,लेकिन बाकी हम खुद बनाते है और हमारा जीवन इसी बात पर निर्भर करता है  कि हम किन लोगों के साथ रहते हैं ! माता - पिता ,भाई -बहन , दादा - दादी , नाना -नानी ,   सारे रिश्ते हमारे जन्म के साथ ही बन जाते हैं इसमें हमारा कुछ विशेषाधिकार नहीं होता हैं लेकिन जैसे -जैसे हम बड़े होते हैं तो कुछ रिश्ते खुद ब खुद बन जाते हैं ! और इन्ही रिश्तों में से एक हैं दोस्ती !
अक्सर सभी बच्चों के माता -पिता अपने बच्चों की गलती पर उसके दोस्तों को जिम्मेदार ठहराते हैं कि दोस्तों की वजह से बिगड़ गया हैं ये तो ऐसा था ही नहीं ! जरा सोचने वाली बात हैं कि अगर सभी माता -पिता  दूसरे बच्चों  को जिम्मेदार ठहराते हैं तो बचा कौन ? सभी अगर एक दूसरे पर उंगली उठाते हैं तो ऐसा कौन होगा जिसके तरफ उंगली नहीं होगी !
दरअसल दोस्ती एक पवित्र और सच्चा रिस्ता होता हैं ! जब आप दोस्तों के साथ रहोगे चाहे कितनी भी परेशानी क्यों न हो , आपको उसका एहसास नहीं होगा , दोस्तों के साथ रहने से सारी दुस्वारियां दूर हो जाती हैं !
जब आप किसी भी कारण से भर से दूर हो जाते हैं चाहे पढाई के लिए या फिर नौकरी के लिए ,तब  आपका सारा परिवार पीछे छूट जाता हैं ! उस समय  जिसका सहारा मिलता हैं , वो दोस्त होता हैं ! जब आपके सामने कोई समस्या आती हैं तो वो दोस्त ही होता हैं जो सबसे आगे खड़ा  होता हैं !

Wednesday, 5 April 2017

yesss we can do anything

नमस्कार मित्रगण
आज बहुत दिन कुछ लिखने का मौका मिला हैं क्योंकि रूटीन थोड़ा बहोत व्यस्त हो गया हैं इस वजह से मेरा मन भी नही लग रहा था तो सोचा कि  चलो कुछ किया जाए !
मैं क्या कर सकता हूँ या आप क्या कर सकते हैं , इसकी कोई सिमा नही हैं ! इस दुनिया मैं इस कुछ भी नही हैं जो हम नही कर सकते हैं ! क्योंकि चंद  प्राकृतिक चीजों को छोड़कर जो कुछ भी इस संसार में हैं ,  वो सब मनुष्य के द्वारा ही निर्मित हैं ! मैं ये भी नही कहता कि सारी चीजें कुछ ही बरसों में निर्मित हो गयी और उसे  सिर्फ एक या कुछ लोगों के समूह ने मिलकर बना दिया ! ये सब हुआ हैं मानवजाति  की बरसों की मेहनत के उपरांत !
आज तक इस धरती पर कई पीढियां हुई और सभी से जो बन पड़ा , वो योगदान इस संसार को मिला ! अगर इस नही हुआ होता तो आज के संसार और 50000 साल पहले के संसार में कोई अंतर नही रह जाता ! धीरे धीरे मगर निरंतर प्रयासों के कारण ही हम आज की सुविधापूर्ण दुनिया में साँस ले पा रहे हैं ! 
दोस्तों , हम भी इस संसार के ऋणी हैं क्योंकि  यहां हमे जीवन मिला हैं और जो जीवन दे वो तो पूजनीय हैं ! तो हमारा भी फर्ज बनता हैं कि इस संसार को कुछ देकर जाएँ ताकि  इसकी रचना में थोड़ी ही हिस्सेदारी हमारी भी हो ! क्योंकि हमें तो बहुत कुछ मिला हैं संसार से , अब थोड़ा तो  हम भी कर ही सकते हैं !
अगर हम ये सोचें कि हमें क्या लेना इस सबसे ! ये सिर्फ सामाजिक लोगों का काम हैं , हमें फुरसत कहाँ हैं ? तो मैं बता दूँ कि जिस दिन नेपोलियन का जन्म हुआ होगा , उस दिन और भी बहुत सारे लोगों ने जन्म लिया होगा ! मगर हम सिर्फ नेपोलियन को जानते हैं ! क्यूँ ? क्या भगवन ने उसे कुछ और ही नाक नक्स दिया था या फिर उसके दो से अधिक हाथ पावँ थे ? या फिर उसे कोई दैविक शक्ति प्राप्त थी ?  
ये बात आप भी जानते हैं कि जो बातें मैंने ऊपर कहीं हैं इस में कुछ भी बिशेष नही था ! बिशेष बात ये हैं कि नेपोलियन ने अपने जीवन मैं ऐसा  काम कर दिया था कि उसे भुलाया ही नही जाया सकता ! उसने अपना पूरा जीवन अपने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था !  बात सिर्फ नेपोलियन की ही नही हैं ! बात हैं उन सब महान सख्शियतों जिनका नाम  बड़े आदर और गर्व से लेते हैं ! जरुरी नही कि सबकुछ छोड़कर सामाजिक कार्यों में लग जाएँ ! ये भी सही नही हैं ! क्योंकि आपके कुछ अपने भी होतें हैं जिन्हें आपसे बहुत उम्मीद होती हैं ! मेरी सोच ये हैं कि जिस क्षेत्र  में रहें उसी में अपना सर्वश्रेष्ठ दें ! ताकि लोग आपके बाद भी आपका नाम और काम नही भूल सकें ! 
हम जब भी कभी रेलवे स्टेशन , सड़क , फुटपाथ  और ऐसी कुछ जगहों पर असहाय लोगों को देखते हैं तो तकलीफ होती हैं ! खासकर बच्चों को देखकर किसका दिल नही पसीजता होगा ! वो जूठे बर्तनों में भी आशा की नज़रों से देखते हैं कि शायद कुछ मिल जाये !  दुर्भाग्यवश उन्हें कुछ भी नही मिलता ! मैं पूछता हूँ कि  क्या वो देश के नागरिक नही हैं ? उन्हें खाने के लिए भी कुछ नही मिल सकता ? सरकार की योजनाएं सिर्फ बाकि लोगों के लिए ही होती हैं ? 
मैंने जब अपने एक मित्र से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया  की योजनाएं तो बनती हैं और पैसा भी आवंटित हो जाता हैं लेकिन उसे अपने द्वारा बनाये गए चैरिटी में चुपके से भेज दिया जाता हैं!  कुछ लोग मजबूर के हक़ को भी छीन लेते हैं ! 
मेरे कहने का उद्देश्य ये था कि अगर हम सावधान हो जाएँ तो कौन उनका हक छीन सकता हैं ?  ऐसा कौन सा काम हैं जो हम नही कर सकते हैं ! बस जब तक अपने लक्ष्य को पाने में सफल न हो जाएँ , तब तक ऐसे लोगों से दूर हो जाएँ जो आपसे ये कहें , कि  तुम यह नही कर सकते ! 
              चलोगे तो रोकने वाले मिलेंगे 
              रुकोगे तो टोकने वाले मिलेंगे
           

Saturday, 18 March 2017

People Around Us

hello friends
मैं जो भी लिखता हूँ वो मेरा अपना अनुभव ही होता हैं जो मैं हूबहू आप सब से शेयर  करता हूँ ! मैं भी यह  मानता हूँ कि आपके आस पास के लोग आपके ऊपर जरूर असर डालते हैं ! आपकी सफलता या असफलता इस  बात पर निर्भर करती हैं कि  आप किन लोगों के साथ रहते हैं !
 तो दोस्तों जब हमें ये पता हो कि किन लोगों के साथ रहने से  मेरे लिए अच्छा होगा तो क्यों न हम उन्हीं के साथ रहें ! 
मैं BCA III YEAR का स्टूडेंट हूँ ! और क्योंकि गांव से ताल्लुक रखता था तो पढाई के लिए तो घर से निकलना जरुरी था ! तो मैं पटना  गया ! यहाँ आने के बाद कॉलेज क्लास में अकेले बैठता था , सर आते पढ़ाते और चले जाते !  मैं भी क्लास करने के बाद सीधे घर पहुँच जाता ! किसी से बातचीत तक नही ! इसकी वजह सायद मेरी झिझक थी ! जो भी हो मगर  मैं सबसे अलग रहता था ! धीरे -धीरे समय बिताता गया !   अब फर्स्ट ईयर लगभग 4 महीने बीत चुके थे ! लेकिन मुझमे कोई बदलाव नही ! मैं इतना शर्मीला था कि  किसी से बात करने में पसीने छूट जाते थे ! आखिर में,जो लोग आज मेरे बहुत करीब हैं , उन्ही लोगों ने मुझसे बात करनी शुरू करी !  उसके बाद धीरे -धीरे  मैं सबसे घुलने मिलने लगा !  फिर कुछ ही महीनों में हम सब बहुत करीब हो गए ! पढाई भी बहुत अच्छे से होने लगी !  और सबसे खास बात :  अब यह नही लगता था कि हम सब लोग अलग -अलग जगह से हैं !  
क्योंकि मेरा  इस ब्लॉग को लिखने का मकसद ही यही हैं कि आखिर बता सकूँ कि आपके आसपास के अच्छे लोग कैसे आपको बदल देते हैं ! फिर सेकण्ड ईयर में आकर सबने एक ग्रुप बनाया ! जिसका नाम PABLANDER हैं ये एडुकेशनल ग्रूप हैं जिसमे हमलोग खुद ही बैठ कर पढाई करते हैं ! चाहे BCA के  लिए  हो या फिर MCA एंट्रेस  के PREPARATION  के लिए ! और इसका टाइम COLLEGE और COACHING के टाइम के आलावा होता हैं ! और सब लोग इतने DEDICATED  कि अगर कहा जाये की दिन भर रुकना हैं तो भी कोई प्रॉब्लम नही ! ये  असर होता हैं आसपास के लोगों का ! 
मेरा कल BIRTHDAY था और मैं घर से भी दूर था ! लेकिन एक पल के लिए भी इस महसूस नही हुआ की मैं अपने FAMILY से दूर हूँ !  सारे अरेंजमेंट वही लोग किये और मुझे कुछ पता भी नही चला !  कल का दिन मेरे जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिनों में से एक था ! मुझे अपनों दोस्तों से इतना कुछ मिला हैं कि  अगर अपने जीवन की सारी  खुशियां भी दे दूँ फिर भी ये नाकाफी होगा ! 
आप सोच सकते हैं कि जो इंसान सबसे बात करने में इतना HASITATE  होता था वो आज आप सब से ये बातें शेयर कर रहा हैं ! मेरे दोस्त मेरी जिंदगी की वो कमाई हैं जो मैं कभी खर्च नही करना चाहता ! 
तो दोस्तों कोशिश हमेसा यही रहनी चाहिए कि अच्छे लोगों के साथ रहें जो आपको जीवन की बारीकियां  सकें और हमेसा आपके साथ रहे ! चाहे आप अमीर हो या गरीब ! इससे उन्हें फर्क नही पड़ता हैं क्योंकि वो तो ऐसी सीमाएं कब के  पार कर चुके होते हैं ! 
और अंत में ,
                                   आपके नजरों में ग़मों को खोज लेते हैं 
                                     फिर आपके कन्धों से सारा बोझ लेते हैं।,
                                     आपकी ख़ुशी में उनकी ख़ुशी है ,
                                     यही कसम तो रोज लेते हैं 
                                                                                                                                 THANKS A LOT

Thursday, 16 March 2017

Computer Education In Rural Area's

नमस्कार  मित्रों
मुझे जो भी  ऐसा लगता हैं कि आप लोगों से शेयर करनी चाहिए , मैं बेझिझक वो बातें  सबके सामने रखता हूँ ! 
हम सभी जानते हैं कि आज के समय में कंप्यूटर की  क्या महत्ता हैं और हम इसे स्वीकार भी करते हैं ! क्योंकि आज  के समय में कंप्यूटर के बिना जीवन की कल्पना करना संभव ही नही हैं ! चाहे आप किसी भी  क्षेत्र को क्यों न लें , कंप्यूटर हर जगह अनिवार्य हैं !
 आप सब लोग सोच रहे होंगे कि ये सारी बातें तो हम जानते ही हैं ! बिलकुल जानते होंगे ! मगर  मेरे मन में एक विचार आया था और उसी विचार से प्रेरित होकर मैं अपनी बात आप सब  के सामने  रखने जा रह हूँ !
भारत में कंप्यूटर लाने का श्रेय हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधी को जाता हैं ! और उन्ही के प्रयासों का नतीजा हैं कि  आज हमारे देश में भी कंप्यूटर नेटवर्क का जाल बिछ गया हैं ! लेकिन एक सच्चाई यह भी हैं कि आज भी बहुत सारे गांव के लोग कंप्यूटर के बारे में जानते तक भी नही हैं ! और इसमें कोई आश्चर्य  नही हैं क्योंकि आज भी हमारे देश में कई ऐसे गांव हैं जहाँ  अभी तक बिजली भी नही पहुंची हैं तो कंप्यूटर की बात करना भी बेमानी हैं ! लेकिन सरकार के प्रयासों से इस क्षेत्र में  बहुत तेजी से काम  हो रहा हैं जिसका श्रेय उन्हें मिलना ही चाहिए ! 
मैं बात संभावनाओं की कर रहा हूँ क्योंकि आप सोच सकते हैं  कि हमारे देश मैं कंप्यूटर  कितनी तेजी से फ़ैल सकता हैं ! अभी गांव के बच्चे जो सातवीं - आठवीं क्लास के होतें हैं वो कंप्यूटर का नाम भी नहीं जानते कि आखिर ये किस चिड़ियाँ का नाम हैं ! वे मॉनिटर , माउस  आदि का नाम सुनते ही मुंह टेढ़ा कर लेते हैं ! क्योंकि ये सारी चीजें उनके लिए बिलकुल ही नई है ! लेकिन उत्सुकता में कोई कमी नही रहती हैं ! आप
 लैपटॉप लेकर बैठ जाइये और देखिये कुछ ही देर में आपके आसपास कुम्भ का मेला लग जायेगा ! इसका सीधा मतलब हैं कि लोग कंप्यूटर के बारे मै  जानना चाहते हैं ! सीखना चाहते हैं ! क्योंकि अब तो गांव के लोग भी इसकी महत्ता  समझते हैं ! क्योंकि वो भी तो देखते हैं कि  जगह तो इसे देखते ही हैं चाहे फिर स्कूल  हो  या बैंक ! 
हम बहुत सारे हैं और अलग अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हैं ! तो क्यों न अपने युथ पावर का सही उपयोग किया जाये !  अगर सोचें , तो  अगली कंप्यूटर क्रांति इंडिया से शुरू हो सकती हैं क्योंकि हमारे पास सबसे ज्यादा  युथ पावर हैं बस जरूरत हैं तो सिर्फ उसे सही दिशा देने की ! क्योंकि नदी मैं चाहे कितना भी पानी क्यों न रहे , अगर उसकी दिशा सही न हो तो तबाही के आलावा कुछ नही मिलता !  तो क्यों न हम इस नदी की तेज धारा को सही दिशा दें ताकि ये अनवरत काल तक लोगों का कल्याण करता रहे ! और हम भी तो इन्हीं धाराओं के हिस्सें हैं ! तो हम भी इनके साथ चल पड़ेंगे ! 
 सोचिये कि 600000  गांव में अगर कंप्यूटर फैलाना हैं तो कितने रोजगार के रास्ते खुलेंगे ! कितने सारे कंप्यूटर्स की जरुरत होगी ? कितने सारे कंप्यूटर टीचर्स चाहिए  होंगे ? कितनी साड़ी कंप्यूटर कंपोनेंट्स और सॉफ्टवेर बनानेवाली कम्पनीज की जरूरत होगी ?  इन सारी चीजों के एक लंबी फेहरिस्त बन सकती हैं ! बस अब बात ये समझनी हैं कि इसे जमीं पर कैसे लाया जाये ? आप सोच रहे होंगे कि आईडिया तो बहुत अच्छा हैं लेकिन मुश्किल हैं ! तो मैं आपको एक बात याद दिल दूँ ! स्वामी विवेकानंद ने एक बार कहा था "  तुम मुझे 100  ऊर्जावान और इनोवेटिव लोग दे दो , मैं पूरी दुनिया बदल दूंगा " ध्यान रहे कि  ये बात उन्होने लगभग 120 साल पहले कही थी , ,और वो सिर्फ 100  लोगों की बात कर रहे थे ! मगर हम आज इक्कीसवीं सदी में हैं और 125  करोड़  हैं  ! तो क्यों न उनका सपना हम पूरा करें अपने देश , अपने समाज को आत्मनिर्भर बनाकर ? उन्होंने तो अपनी अल्पायु  में ही इतना कुछ कर दिया कि  आज की  पीढ़ी  उनका ऋण  उतार सकती !  अगर हम उनके सपनों को पूरा करते हैं तो ये उनके लिए  सच्ची श्रधांजलि होगी ! 
 और अंत में  , किसी ने  सही कहा हैं - आओ  की कोई ख्वाब बुनें , कल के वास्ते 
                                                        वरना ये रात , आज के संगीन दौर की 
                                                         डस लेगी जानो-दिल को कुछ ऐसे ही जानो - दिल 
                                                        ता - उम्र  फिर न कोई हसीं  ख्वाब बन सके ! 
                                                                                           
                                                                                                                                  धन्यवाद  आप सबों                                                                                                                                       के सहयोग के लिए !  













Wednesday, 15 March 2017

We Are Nothing Without Them

Please don't forget your root 
नमस्कार
आज मैं जिनके बारे में बात करने जा रहा हूँ ,उनके बारे में जितना भी कहा जाये वो कम ही हैं ! जी हाँ ! आप  बिलकुल सही सोच रहे हैं,  मैं  पेरेण्ट्स की ही बात कर रहा हूँ !माँ - बाप क्या कुछ नही करते हमारे लिए ! और हम क्या करते हैं , जब उनको हमारी सबसे ज्यादा जरुरत होती हैं , तो उनसे मुंह मोड़ लेते हैं ! आखिर क्यों ?उनका गुनाह क्या रहता हैं ? यही कि बच्चे के जन्म के बाद खुद के बारे में सोचना ही छोड़ देते   हैं ! जो लोग हमेशा मस्ती करनेवाले होते हैं , वो भी पेरेंट्स  बनने के बाद गंभीर  हो जाते हैं !  उनकी अपनी खुशी क्या थी ? अपने सपने क्या थे ? , सब कुछ भूलकर अपने बच्चों की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी देखने लगते हैं ! उन्ही के सपनों को अपना मानकर बच्चों के सारे सपने पुरे होने  की कामना करते हैं !
माँ - बाप चाहे कितने भी परेशान क्यों न हों ! चाहे उन्हें कितनी भी तकलीफें क्यों न हो , वे अपनी तकलीफें  बच्चों के सामने नही लाना चाहते हैं , ताकि हमे कोई परेशानी न हो ! वो अपनी तकलीफों में खुद ही खोये रहते हैं और हम उनसे कुछ पूछने का कष्ट  नही करना चाहते !आखिर क्यों ? बार बार मेरे मुंह से यही सवाल निकलता हैं ! हमे कुछ भी चाहिए होती हैं और जैसे ही हम अपने पेरेंट्स से कहते हैं , तो  भले ही उनके पास  वो चीज खरीदने के या देने के क्षमता नही होती हैं ,  लेकिन कहीं न कहीं से वो हमारी हर ख्वाहिश को  पूरा करने की  कोशिश करते हैं ! क्यों ?
वो भी पेरेंट्स ही होते हैं जिन्हें अपने खाने की चिंता तो नही रहती हैं फिर भी दिन भर कूड़े  के  ढेर से  जिंदगी तलाशते रहते हैं कि सायद कुछ मिल जाता तो मेरा बच्चा जो भूख की तपिश में पूरी तरह से खाली खाने की प्लेट से कुछ तलाशने की कोशिश कर रहा होगा , उसके लिए कुछ ले लेता ! ये होता हैं माँ - बाप का प्यार ! और वही बच्चा  जब बड़ा हो जाता हैं   तो  झुककर प्रणाम भी नही कर सकता ! अगर कमर में दर्द हो गया तो !
लेकिन मैं यह बात अच्छी तरह से जानता हूँ कि भले ही दुनिया कितनी भी क्यों न बदल जाये , लेकिन हम भारतीय अपनी जिम्मेदारियों को नही भूल सकते ! चाहें हम कहीं भी क्यों न रहें , उनका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ  साये की तरह रहता हैं जो हमें हर तरह की परेशानियों  को झेलने की शक्ति देता हैं !
इसलिए , हम उन्हें कभी नही भूल सकते ! और याद रखें कि एक न एक दिन तो हम भी पेरेंट्स बनेंगे और जो चीजें हमारे बच्चे देखेंगे , वही तो सीखेंगे !
अंततः  हमे  यह फिर से साबित करना हैं कि  हम भारतीय अभी भी अपने संस्कारों को नहीं भूले हैं और नाहिं भूलेंगे !
                                                                                                                          धन्यवाद
                                                                                                                                               शुभ रात्रि


Monday, 13 March 2017

Give A Step For Your Village

सुप्रभात  मित्रगण 
ये ब्लॉगर पर मेरा पहला  ब्लॉग हैं तो मैंने सोचा   कि क्यों  न  शुरुआत गांव  के मुद्दे  से ही किया जाये !
मुझे अपने गांव से बहुत प्यार हैं और आपलोगों को भी होगा ! हम चाहे कहीं भी रहें मगर अपने गांव , अपनी मिट्टी ,अपने समाज और अपने संस्कार को नही भूल सकते !और भूलें भी क्यों ? जिस गांव ने  हमें हमेशा अपना माना हैं जिन लोगों ने हमें अपना माना हैं , उस गांव के प्रति , उन लोगों के प्रति  हमारा   उत्तरदायित्व  बनता हैं कि उनके लिए कुछ कर सकें !
मेरी  आपको एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ ! चीन में एक गांव था , जिसका नाम हुआनक्सी था ! 60 - 70 के दशक में उस गांव के हालात दयनीय थी ! वहां कचची  सड़कें थी  , ट्रांसपोर्ट , स्कूल , हॉस्पिटल  और  अन्य मुलभुत सुविधाएँ जो आवश्यक होतीं हैं ,  नदारद थी ! मगर इतनी दिक्कतों के बीच एक चीज उत्साह बढ़ानेवाली थी कि  उस गांव के लोग भी  बहुत  मेहनती थे जैसे  कि हर गांव के होते  हैं इस वजह से खाने पिने  मैं कोई दिक्कत नही थी !
उस समय एक चीनी कम्युनिस्ट नेता ने  इस  गांव के बारे में सोचा कि  अगर इस गांव के लोगों को सही दिशा दे दी जाये तो येलोग कुछ भी कर सकते हैं ! उन्होंने उसी समय ठान लिया कि मुझे इस गांव को आत्मनिर्भर बनाना हैं ! उसके  बाद उन्होंने प्रयत्न करने शुरू कर दिए ! सबसे पहले कुछ छोटे-छोटे उद्योग लगाए गए जिसके लिए जो भी कच्ची सामग्री चाहिए थी वो सब किसान खेत में ही उपजाने लगे जिसके उन्हें भी अपनी फसल का सही दाम मिलने लगा और फैक्ट्री को भी !
 अब उस गांव के अभी के कंडीशन के बारे में सुनिये ! उस गांव में सडकें बहुत अच्छी बन चुकी हैं गांव में खाने के लिए पैसा नही लगता हैं ! सब लोग गांव के मेस में खाने कहते  हैं ! जहाँ कभी स्कूल  भी नहीं था वहां आज कॉलेज भी हैं और पढाई के लिए बिलकुल भी पैसा नही लगता हैं ! मेडिकल फैसिलिटी  मुफ्त हैं ! बृद्ध लोगों के लिए पैंशन के सुविधा गांव ही करती हैं ! गांव का अपना ट्रांसपोर्टिंग सिस्टम हैं ताकि किसी को भी आने जाने में  दिक्कत न हो ! और उस गांव किए आबादी मात्र  5000 हैं लेकिन बाहर से बहुत सारे लोग आकर वहां नौकरी करते हैं ! हुकनसी की एक ईमारत दुनिया के टॉप 5 ईमारत में आती हैं , जिसमे 5000  लोग रह सकते हैं मतलब जितने  भी  गांववाले हैं सब ! और सभी के अकाउंट में 32  लाख युआन की सम्पति हैं हैं ! अब इससे ज्यादा लोगों को क्या चाहिए !
सिर्फ एक इंसान ने ये बात आज से 60  साल पहले सोचा और उसे आदर्श गांव बना दिया !  लेकिन हम तो बहुत सारे हैं और 60  साल बाद वाली पीढ़ी से हैं हैं ! तब हमलोग  कुछ क्यों नहीं सकते , बिलकुल कर सकते हैं ! 
भारत में 600000 गांव हैं !  गांव के दस लोग भी इसे  समझ कर कदम बढ़ाएं तो हमारा देश अगले  में चोटी  पर होगा , इसमें संदेह की कोई गुंजाइश नही हैं ! और मुझे ये भी पता हैं कि हम सब अपने देश से बहुत प्यार करते हैं तो क्यों न एक कदम हम भी बढ़ाएं इसकी बेहतरी के लिए !
                                                                                                                                        धन्यवाद 
 

My Views About God

इंसान जन्म लेता हैं और एक निश्चित अवधि पूरी करने के बाद मृत्यु को प्राप्त होता हैं ! इस बीच वो जो वक्त होता हैं वो कर्त्तव्य पालन का होता ह...