Saturday, 18 March 2017

People Around Us

hello friends
मैं जो भी लिखता हूँ वो मेरा अपना अनुभव ही होता हैं जो मैं हूबहू आप सब से शेयर  करता हूँ ! मैं भी यह  मानता हूँ कि आपके आस पास के लोग आपके ऊपर जरूर असर डालते हैं ! आपकी सफलता या असफलता इस  बात पर निर्भर करती हैं कि  आप किन लोगों के साथ रहते हैं !
 तो दोस्तों जब हमें ये पता हो कि किन लोगों के साथ रहने से  मेरे लिए अच्छा होगा तो क्यों न हम उन्हीं के साथ रहें ! 
मैं BCA III YEAR का स्टूडेंट हूँ ! और क्योंकि गांव से ताल्लुक रखता था तो पढाई के लिए तो घर से निकलना जरुरी था ! तो मैं पटना  गया ! यहाँ आने के बाद कॉलेज क्लास में अकेले बैठता था , सर आते पढ़ाते और चले जाते !  मैं भी क्लास करने के बाद सीधे घर पहुँच जाता ! किसी से बातचीत तक नही ! इसकी वजह सायद मेरी झिझक थी ! जो भी हो मगर  मैं सबसे अलग रहता था ! धीरे -धीरे समय बिताता गया !   अब फर्स्ट ईयर लगभग 4 महीने बीत चुके थे ! लेकिन मुझमे कोई बदलाव नही ! मैं इतना शर्मीला था कि  किसी से बात करने में पसीने छूट जाते थे ! आखिर में,जो लोग आज मेरे बहुत करीब हैं , उन्ही लोगों ने मुझसे बात करनी शुरू करी !  उसके बाद धीरे -धीरे  मैं सबसे घुलने मिलने लगा !  फिर कुछ ही महीनों में हम सब बहुत करीब हो गए ! पढाई भी बहुत अच्छे से होने लगी !  और सबसे खास बात :  अब यह नही लगता था कि हम सब लोग अलग -अलग जगह से हैं !  
क्योंकि मेरा  इस ब्लॉग को लिखने का मकसद ही यही हैं कि आखिर बता सकूँ कि आपके आसपास के अच्छे लोग कैसे आपको बदल देते हैं ! फिर सेकण्ड ईयर में आकर सबने एक ग्रुप बनाया ! जिसका नाम PABLANDER हैं ये एडुकेशनल ग्रूप हैं जिसमे हमलोग खुद ही बैठ कर पढाई करते हैं ! चाहे BCA के  लिए  हो या फिर MCA एंट्रेस  के PREPARATION  के लिए ! और इसका टाइम COLLEGE और COACHING के टाइम के आलावा होता हैं ! और सब लोग इतने DEDICATED  कि अगर कहा जाये की दिन भर रुकना हैं तो भी कोई प्रॉब्लम नही ! ये  असर होता हैं आसपास के लोगों का ! 
मेरा कल BIRTHDAY था और मैं घर से भी दूर था ! लेकिन एक पल के लिए भी इस महसूस नही हुआ की मैं अपने FAMILY से दूर हूँ !  सारे अरेंजमेंट वही लोग किये और मुझे कुछ पता भी नही चला !  कल का दिन मेरे जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिनों में से एक था ! मुझे अपनों दोस्तों से इतना कुछ मिला हैं कि  अगर अपने जीवन की सारी  खुशियां भी दे दूँ फिर भी ये नाकाफी होगा ! 
आप सोच सकते हैं कि जो इंसान सबसे बात करने में इतना HASITATE  होता था वो आज आप सब से ये बातें शेयर कर रहा हैं ! मेरे दोस्त मेरी जिंदगी की वो कमाई हैं जो मैं कभी खर्च नही करना चाहता ! 
तो दोस्तों कोशिश हमेसा यही रहनी चाहिए कि अच्छे लोगों के साथ रहें जो आपको जीवन की बारीकियां  सकें और हमेसा आपके साथ रहे ! चाहे आप अमीर हो या गरीब ! इससे उन्हें फर्क नही पड़ता हैं क्योंकि वो तो ऐसी सीमाएं कब के  पार कर चुके होते हैं ! 
और अंत में ,
                                   आपके नजरों में ग़मों को खोज लेते हैं 
                                     फिर आपके कन्धों से सारा बोझ लेते हैं।,
                                     आपकी ख़ुशी में उनकी ख़ुशी है ,
                                     यही कसम तो रोज लेते हैं 
                                                                                                                                 THANKS A LOT

Thursday, 16 March 2017

Computer Education In Rural Area's

नमस्कार  मित्रों
मुझे जो भी  ऐसा लगता हैं कि आप लोगों से शेयर करनी चाहिए , मैं बेझिझक वो बातें  सबके सामने रखता हूँ ! 
हम सभी जानते हैं कि आज के समय में कंप्यूटर की  क्या महत्ता हैं और हम इसे स्वीकार भी करते हैं ! क्योंकि आज  के समय में कंप्यूटर के बिना जीवन की कल्पना करना संभव ही नही हैं ! चाहे आप किसी भी  क्षेत्र को क्यों न लें , कंप्यूटर हर जगह अनिवार्य हैं !
 आप सब लोग सोच रहे होंगे कि ये सारी बातें तो हम जानते ही हैं ! बिलकुल जानते होंगे ! मगर  मेरे मन में एक विचार आया था और उसी विचार से प्रेरित होकर मैं अपनी बात आप सब  के सामने  रखने जा रह हूँ !
भारत में कंप्यूटर लाने का श्रेय हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधी को जाता हैं ! और उन्ही के प्रयासों का नतीजा हैं कि  आज हमारे देश में भी कंप्यूटर नेटवर्क का जाल बिछ गया हैं ! लेकिन एक सच्चाई यह भी हैं कि आज भी बहुत सारे गांव के लोग कंप्यूटर के बारे में जानते तक भी नही हैं ! और इसमें कोई आश्चर्य  नही हैं क्योंकि आज भी हमारे देश में कई ऐसे गांव हैं जहाँ  अभी तक बिजली भी नही पहुंची हैं तो कंप्यूटर की बात करना भी बेमानी हैं ! लेकिन सरकार के प्रयासों से इस क्षेत्र में  बहुत तेजी से काम  हो रहा हैं जिसका श्रेय उन्हें मिलना ही चाहिए ! 
मैं बात संभावनाओं की कर रहा हूँ क्योंकि आप सोच सकते हैं  कि हमारे देश मैं कंप्यूटर  कितनी तेजी से फ़ैल सकता हैं ! अभी गांव के बच्चे जो सातवीं - आठवीं क्लास के होतें हैं वो कंप्यूटर का नाम भी नहीं जानते कि आखिर ये किस चिड़ियाँ का नाम हैं ! वे मॉनिटर , माउस  आदि का नाम सुनते ही मुंह टेढ़ा कर लेते हैं ! क्योंकि ये सारी चीजें उनके लिए बिलकुल ही नई है ! लेकिन उत्सुकता में कोई कमी नही रहती हैं ! आप
 लैपटॉप लेकर बैठ जाइये और देखिये कुछ ही देर में आपके आसपास कुम्भ का मेला लग जायेगा ! इसका सीधा मतलब हैं कि लोग कंप्यूटर के बारे मै  जानना चाहते हैं ! सीखना चाहते हैं ! क्योंकि अब तो गांव के लोग भी इसकी महत्ता  समझते हैं ! क्योंकि वो भी तो देखते हैं कि  जगह तो इसे देखते ही हैं चाहे फिर स्कूल  हो  या बैंक ! 
हम बहुत सारे हैं और अलग अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हैं ! तो क्यों न अपने युथ पावर का सही उपयोग किया जाये !  अगर सोचें , तो  अगली कंप्यूटर क्रांति इंडिया से शुरू हो सकती हैं क्योंकि हमारे पास सबसे ज्यादा  युथ पावर हैं बस जरूरत हैं तो सिर्फ उसे सही दिशा देने की ! क्योंकि नदी मैं चाहे कितना भी पानी क्यों न रहे , अगर उसकी दिशा सही न हो तो तबाही के आलावा कुछ नही मिलता !  तो क्यों न हम इस नदी की तेज धारा को सही दिशा दें ताकि ये अनवरत काल तक लोगों का कल्याण करता रहे ! और हम भी तो इन्हीं धाराओं के हिस्सें हैं ! तो हम भी इनके साथ चल पड़ेंगे ! 
 सोचिये कि 600000  गांव में अगर कंप्यूटर फैलाना हैं तो कितने रोजगार के रास्ते खुलेंगे ! कितने सारे कंप्यूटर्स की जरुरत होगी ? कितने सारे कंप्यूटर टीचर्स चाहिए  होंगे ? कितनी साड़ी कंप्यूटर कंपोनेंट्स और सॉफ्टवेर बनानेवाली कम्पनीज की जरूरत होगी ?  इन सारी चीजों के एक लंबी फेहरिस्त बन सकती हैं ! बस अब बात ये समझनी हैं कि इसे जमीं पर कैसे लाया जाये ? आप सोच रहे होंगे कि आईडिया तो बहुत अच्छा हैं लेकिन मुश्किल हैं ! तो मैं आपको एक बात याद दिल दूँ ! स्वामी विवेकानंद ने एक बार कहा था "  तुम मुझे 100  ऊर्जावान और इनोवेटिव लोग दे दो , मैं पूरी दुनिया बदल दूंगा " ध्यान रहे कि  ये बात उन्होने लगभग 120 साल पहले कही थी , ,और वो सिर्फ 100  लोगों की बात कर रहे थे ! मगर हम आज इक्कीसवीं सदी में हैं और 125  करोड़  हैं  ! तो क्यों न उनका सपना हम पूरा करें अपने देश , अपने समाज को आत्मनिर्भर बनाकर ? उन्होंने तो अपनी अल्पायु  में ही इतना कुछ कर दिया कि  आज की  पीढ़ी  उनका ऋण  उतार सकती !  अगर हम उनके सपनों को पूरा करते हैं तो ये उनके लिए  सच्ची श्रधांजलि होगी ! 
 और अंत में  , किसी ने  सही कहा हैं - आओ  की कोई ख्वाब बुनें , कल के वास्ते 
                                                        वरना ये रात , आज के संगीन दौर की 
                                                         डस लेगी जानो-दिल को कुछ ऐसे ही जानो - दिल 
                                                        ता - उम्र  फिर न कोई हसीं  ख्वाब बन सके ! 
                                                                                           
                                                                                                                                  धन्यवाद  आप सबों                                                                                                                                       के सहयोग के लिए !  













Wednesday, 15 March 2017

We Are Nothing Without Them

Please don't forget your root 
नमस्कार
आज मैं जिनके बारे में बात करने जा रहा हूँ ,उनके बारे में जितना भी कहा जाये वो कम ही हैं ! जी हाँ ! आप  बिलकुल सही सोच रहे हैं,  मैं  पेरेण्ट्स की ही बात कर रहा हूँ !माँ - बाप क्या कुछ नही करते हमारे लिए ! और हम क्या करते हैं , जब उनको हमारी सबसे ज्यादा जरुरत होती हैं , तो उनसे मुंह मोड़ लेते हैं ! आखिर क्यों ?उनका गुनाह क्या रहता हैं ? यही कि बच्चे के जन्म के बाद खुद के बारे में सोचना ही छोड़ देते   हैं ! जो लोग हमेशा मस्ती करनेवाले होते हैं , वो भी पेरेंट्स  बनने के बाद गंभीर  हो जाते हैं !  उनकी अपनी खुशी क्या थी ? अपने सपने क्या थे ? , सब कुछ भूलकर अपने बच्चों की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी देखने लगते हैं ! उन्ही के सपनों को अपना मानकर बच्चों के सारे सपने पुरे होने  की कामना करते हैं !
माँ - बाप चाहे कितने भी परेशान क्यों न हों ! चाहे उन्हें कितनी भी तकलीफें क्यों न हो , वे अपनी तकलीफें  बच्चों के सामने नही लाना चाहते हैं , ताकि हमे कोई परेशानी न हो ! वो अपनी तकलीफों में खुद ही खोये रहते हैं और हम उनसे कुछ पूछने का कष्ट  नही करना चाहते !आखिर क्यों ? बार बार मेरे मुंह से यही सवाल निकलता हैं ! हमे कुछ भी चाहिए होती हैं और जैसे ही हम अपने पेरेंट्स से कहते हैं , तो  भले ही उनके पास  वो चीज खरीदने के या देने के क्षमता नही होती हैं ,  लेकिन कहीं न कहीं से वो हमारी हर ख्वाहिश को  पूरा करने की  कोशिश करते हैं ! क्यों ?
वो भी पेरेंट्स ही होते हैं जिन्हें अपने खाने की चिंता तो नही रहती हैं फिर भी दिन भर कूड़े  के  ढेर से  जिंदगी तलाशते रहते हैं कि सायद कुछ मिल जाता तो मेरा बच्चा जो भूख की तपिश में पूरी तरह से खाली खाने की प्लेट से कुछ तलाशने की कोशिश कर रहा होगा , उसके लिए कुछ ले लेता ! ये होता हैं माँ - बाप का प्यार ! और वही बच्चा  जब बड़ा हो जाता हैं   तो  झुककर प्रणाम भी नही कर सकता ! अगर कमर में दर्द हो गया तो !
लेकिन मैं यह बात अच्छी तरह से जानता हूँ कि भले ही दुनिया कितनी भी क्यों न बदल जाये , लेकिन हम भारतीय अपनी जिम्मेदारियों को नही भूल सकते ! चाहें हम कहीं भी क्यों न रहें , उनका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ  साये की तरह रहता हैं जो हमें हर तरह की परेशानियों  को झेलने की शक्ति देता हैं !
इसलिए , हम उन्हें कभी नही भूल सकते ! और याद रखें कि एक न एक दिन तो हम भी पेरेंट्स बनेंगे और जो चीजें हमारे बच्चे देखेंगे , वही तो सीखेंगे !
अंततः  हमे  यह फिर से साबित करना हैं कि  हम भारतीय अभी भी अपने संस्कारों को नहीं भूले हैं और नाहिं भूलेंगे !
                                                                                                                          धन्यवाद
                                                                                                                                               शुभ रात्रि


Monday, 13 March 2017

Give A Step For Your Village

सुप्रभात  मित्रगण 
ये ब्लॉगर पर मेरा पहला  ब्लॉग हैं तो मैंने सोचा   कि क्यों  न  शुरुआत गांव  के मुद्दे  से ही किया जाये !
मुझे अपने गांव से बहुत प्यार हैं और आपलोगों को भी होगा ! हम चाहे कहीं भी रहें मगर अपने गांव , अपनी मिट्टी ,अपने समाज और अपने संस्कार को नही भूल सकते !और भूलें भी क्यों ? जिस गांव ने  हमें हमेशा अपना माना हैं जिन लोगों ने हमें अपना माना हैं , उस गांव के प्रति , उन लोगों के प्रति  हमारा   उत्तरदायित्व  बनता हैं कि उनके लिए कुछ कर सकें !
मेरी  आपको एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ ! चीन में एक गांव था , जिसका नाम हुआनक्सी था ! 60 - 70 के दशक में उस गांव के हालात दयनीय थी ! वहां कचची  सड़कें थी  , ट्रांसपोर्ट , स्कूल , हॉस्पिटल  और  अन्य मुलभुत सुविधाएँ जो आवश्यक होतीं हैं ,  नदारद थी ! मगर इतनी दिक्कतों के बीच एक चीज उत्साह बढ़ानेवाली थी कि  उस गांव के लोग भी  बहुत  मेहनती थे जैसे  कि हर गांव के होते  हैं इस वजह से खाने पिने  मैं कोई दिक्कत नही थी !
उस समय एक चीनी कम्युनिस्ट नेता ने  इस  गांव के बारे में सोचा कि  अगर इस गांव के लोगों को सही दिशा दे दी जाये तो येलोग कुछ भी कर सकते हैं ! उन्होंने उसी समय ठान लिया कि मुझे इस गांव को आत्मनिर्भर बनाना हैं ! उसके  बाद उन्होंने प्रयत्न करने शुरू कर दिए ! सबसे पहले कुछ छोटे-छोटे उद्योग लगाए गए जिसके लिए जो भी कच्ची सामग्री चाहिए थी वो सब किसान खेत में ही उपजाने लगे जिसके उन्हें भी अपनी फसल का सही दाम मिलने लगा और फैक्ट्री को भी !
 अब उस गांव के अभी के कंडीशन के बारे में सुनिये ! उस गांव में सडकें बहुत अच्छी बन चुकी हैं गांव में खाने के लिए पैसा नही लगता हैं ! सब लोग गांव के मेस में खाने कहते  हैं ! जहाँ कभी स्कूल  भी नहीं था वहां आज कॉलेज भी हैं और पढाई के लिए बिलकुल भी पैसा नही लगता हैं ! मेडिकल फैसिलिटी  मुफ्त हैं ! बृद्ध लोगों के लिए पैंशन के सुविधा गांव ही करती हैं ! गांव का अपना ट्रांसपोर्टिंग सिस्टम हैं ताकि किसी को भी आने जाने में  दिक्कत न हो ! और उस गांव किए आबादी मात्र  5000 हैं लेकिन बाहर से बहुत सारे लोग आकर वहां नौकरी करते हैं ! हुकनसी की एक ईमारत दुनिया के टॉप 5 ईमारत में आती हैं , जिसमे 5000  लोग रह सकते हैं मतलब जितने  भी  गांववाले हैं सब ! और सभी के अकाउंट में 32  लाख युआन की सम्पति हैं हैं ! अब इससे ज्यादा लोगों को क्या चाहिए !
सिर्फ एक इंसान ने ये बात आज से 60  साल पहले सोचा और उसे आदर्श गांव बना दिया !  लेकिन हम तो बहुत सारे हैं और 60  साल बाद वाली पीढ़ी से हैं हैं ! तब हमलोग  कुछ क्यों नहीं सकते , बिलकुल कर सकते हैं ! 
भारत में 600000 गांव हैं !  गांव के दस लोग भी इसे  समझ कर कदम बढ़ाएं तो हमारा देश अगले  में चोटी  पर होगा , इसमें संदेह की कोई गुंजाइश नही हैं ! और मुझे ये भी पता हैं कि हम सब अपने देश से बहुत प्यार करते हैं तो क्यों न एक कदम हम भी बढ़ाएं इसकी बेहतरी के लिए !
                                                                                                                                        धन्यवाद 
 

My Views About God

इंसान जन्म लेता हैं और एक निश्चित अवधि पूरी करने के बाद मृत्यु को प्राप्त होता हैं ! इस बीच वो जो वक्त होता हैं वो कर्त्तव्य पालन का होता ह...