Friday, 5 January 2018

Indian Education System

आज का शीर्षक बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हैं क्योंकि शिक्षा किसी भी देश के विकास की नींव होती हैं ! हमें आजादी मिले सत्तर बर्ष से अधिक हो चुके हैं मगर हमारी शिक्षा व्यवस्था अभी भी दोषपूर्ण हैं और इसे सुधारने के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं !
इन्हें मुस्कुराने दो !
सबसे पहले मैं प्राथमिक स्तर की शिक्षा व्यवस्था के ऊपर प्रकाश डालना चाहूंगा ! हमारी सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत आठवीं तक के सभी बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने की व्यवस्था की हैं लेकिन इसमें कुछ कमियां हैं ! मैंने कई सरकारी विद्यालय देखे हैं जिसमे पढाई तो प्रथम से अष्टम वर्ग तक के बच्चों की होती हैं लेकिन उसमे शिक्षकों की संख्या प्रधानाध्यापक सहित केवल पांच हैं ! अब ये बात हजम नही हो रही हैं कि आठ वर्ग पांच शिक्षकों के द्वारा सुचारु रूप से संचालित  होते होंगे !अगर एक वक्त में पांचों शिक्षक पांच वर्ग में हों तो बाकि के तीन वर्ग कैसे संचालित होते होंगे ? यही स्थिति कमोबेश सभी सरकारी संस्थानों की हैं फिर चाहे वो प्राथमिक , मध्य या उच्च शिक्षण संसथान हों ! हमारे संस्थान शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं !
हम आज विकसित राष्ट्र का सपना देख रहे हैं और देखे भी क्यों नहीं ? हमारे पास सारे  संसाधन हैं , युवाओं की फ़ौज हैं , तो अगर हम विकसित होने का सपना नहीं देख सकते तो और कौन देखेगा ? लेकिन हमे समझना होगा कि हम इस अनमोल युवा संसाधन को किस दिशा में मोड़ रहे हैं  उनकी शक्तियां किस प्रयोजन के लिए खर्च हो रही हैं !
हमें practical study पर ज्यादा जोड़ देना होगा वजाय theoretical study
के ! छोटे से बच्चे के ऊपर दस दस विषय का बोझ दे दिया जाता हैं ! अब जो बच्चा डॉक्टर बनना चाहता हैं उसे हिंदी पढ़ने की क्या जरुरत ? जो बच्चा लेखक बनना चाहता हैं उसे गणित पढ़ने की क्या जरूरत ? क्या हम उनकी ऊर्जा को बर्बाद नहीं कर रहे हैं ? और ऐसा भी नहीं कि ये सारे अनैच्छिक विषय उसे दो या तीन बर्षों तक पढ़ने होते हैं बल्कि ये उन्हें बहुत दिनों तक पढ़ना होता हैं !
अगर हम बच्चों के ऊपर से बहुत सारे बिषयों के बोझ हटाकर सिर्फ उसके काम से बिषय उसे पढ़ने दें जो वाकई में उसे पढ़ना हैं तो वो अपनी पूरी ऊर्जा अपने उस इच्छित कार्य पर व्यय करेगा  और भविष्य में कुछ अद्भुत करेगा !

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