Wednesday, 10 January 2018

Emergency Due To Global Warming

ये निवेदन हैं कि बस पांच मिनट निकालकर इसे पढ़ें क्यूंकि ये आपके लिए ही है! 

आज दुनियां ग्लोबल वार्मिंग को निहायत ही बड़े तौर पर झेल रही हैं ! फिर चाहे वो उत्तराखंड की बाढ़ हो , नेपाल का भूकंप हो , अमेरिका में आये हुए तूफान हो  या फिर जापान में आयी हुई सुनामी हो ! हम पाएंगे कि प्रकृति हमसे खुश नहीं हैं और उसका खामियाजा हमे भुगतना पर रहा हैं और आगे भी भुगतना पर सकता हैं अगर हम कोई ठोस कदम नही उठाएं तो !
अभी के समय में एक ही धरती पर , एक ही मौसम में दो अलग अलग जगहों की स्थीति बिलकुल ही भिन्न हैं ! अभी अमेरिका वर्तमान समय की सबसे कड़ाके की ठंढ से जूझ रहा हैं तो वही ऑस्ट्रेलिया भीषण गर्मी से ! ये चीजें इशारा करती हैं कि प्रकृति निश्चित रूप से ही हमसे रूठी हुई हैं और हमारा दायित्व बनता हैं कि इसे मनाएं ! ये कोई उपकार नही होगा जो हम प्रकृति के ऊपर करेंगे बल्कि ये मानवजाति को बचाने के लिहाज से आवश्यक हैं ताकि हमारी पीढ़ियां सुरक्षित रहे !
सहारा का मैदान अपनी भीषण गर्मी के लिए प्रख्यात हैं ! वह नमी नाम की किसी चीज की गुंजाइश भी नहीं की जा सकती लेकिन ताजा खबर ये हैं कि वहां पर बर्फवारी हुई हैं ! अब इसे हम क्या कहेंगे ? ये सारी की सारी चीजें ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हो रही हैं ! कुछ वर्षों में कई रहने योग्य जगहें जीवन के लिए अनुपयुक्त हो जाएगी और फिर कुछ ऐसी जगहें जो अभी बिलकुल ही जीने के लिहाज से उपयुक्त नहीं हैं , वही लोगों के रहने लायक हो जाएगी ! 
हम वन को नहीं बचा पा रहे इससे लगातार वायुमंडल का तापमान बढ़ता जा रहा हैं साथ साथ एयर कंडीशनिंग से निकलने वाली CFC की वजह से ओजोन लेयर को भारी नुकसान झेलना पर रहा हैं जिससे तापमान में बृद्धि हुई हैं लेकिन इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं हैं कि हम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना छोड़ दें ! तापमान में बृद्धि होने से ग्लेशियर ज्यादा तेजी से पिघल रहे हैं !ग्लेशियर के ज्यादा पिघलने से समुन्द्र का जलस्तर बहुत ही तेजी से बढ़ रहा हैं जो कई शहरों को अपने आगोश में ले लेगी जो समुद्र तट पर हैं !
अब प्रकृति ने हमारे लिए खतरे की घंटी बजा दी हैं और वो हमे बार बार सावधान कर रही हैं ! हम प्रकृति को बाद में दोष नहीं दे सकते क्योंकि उसने तो हमे बार बार आगाह किया हैं ! 
अतः अब हमे सोचना ही होगा ! ये अनिवार्य शर्त हैं अगर हम पृथ्वी पर जीवन को बचाना चाहते हैं ! अन्यथा वो दिन दूर नहीं जब ये एक कहानी बन जाएंगी की बहुत साल पृथ्वी नाम के एक गृह पर जीवन संभव था और किसी ग्रह के प्राणी यहां आकर रीसर्च करें कि देखो शायद यह पानी के निशान मिल जाएँ जैसा कि हम अभी मंगल और चन्द्रमा के सन्दर्भ में करते हैं ! उस समय न नील होगी  न गंगा , अमेजन होगी न राइन !
अब सोचो की क्या पृथ्वी को भी इतिहास बनाना हैं या इसे जिवंत रखना हैं !

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