रिश्ते ! हर इंसान के लिए यह शब्द बहुत मायने रखता है ! चाहे वो अमीर हो या गरीब , अच्छा हो या बुरा ! बस फर्क इस बात का होता हैं कि इंसान का रिस्ता किन लोगों से हैं !
कुछ रिश्ते जन्म के साथ -साथ ही बन जाते है जो इंसान को खुद नहीं बनाना होता है ! उस तरह के रिश्ते भगवान् के द्वारा दिया गया पारितोषिक होते हैं और उसमे हमें जो भी मिलता हैं , उसे स्वीकार करना ही होता हैं वहां चुनने की जरुरत भी नहीं होती ,क्योंकि भगवान् हमारे लिए अच्छा ही करते हैं !
कुछ लोग कहते हैं कि रिश्ते भगवान् के घर से बनकर आते हैं ! पता नहीं वो किन रिश्तों की बात करते हैं ! कहा जाता हैं कि हम कुछ नहीं कर सकते जो भगवान् ने सोच रखा है ,वही होगा !
मैं सोचता हूँ कि कुछ रिश्ते भगवान् के घर से बनकर आते हैं ,लेकिन बाकी हम खुद बनाते है और हमारा जीवन इसी बात पर निर्भर करता है कि हम किन लोगों के साथ रहते हैं ! माता - पिता ,भाई -बहन , दादा - दादी , नाना -नानी , सारे रिश्ते हमारे जन्म के साथ ही बन जाते हैं इसमें हमारा कुछ विशेषाधिकार नहीं होता हैं लेकिन जैसे -जैसे हम बड़े होते हैं तो कुछ रिश्ते खुद ब खुद बन जाते हैं ! और इन्ही रिश्तों में से एक हैं दोस्ती !
अक्सर सभी बच्चों के माता -पिता अपने बच्चों की गलती पर उसके दोस्तों को जिम्मेदार ठहराते हैं कि दोस्तों की वजह से बिगड़ गया हैं ये तो ऐसा था ही नहीं ! जरा सोचने वाली बात हैं कि अगर सभी माता -पिता दूसरे बच्चों को जिम्मेदार ठहराते हैं तो बचा कौन ? सभी अगर एक दूसरे पर उंगली उठाते हैं तो ऐसा कौन होगा जिसके तरफ उंगली नहीं होगी !
दरअसल दोस्ती एक पवित्र और सच्चा रिस्ता होता हैं ! जब आप दोस्तों के साथ रहोगे चाहे कितनी भी परेशानी क्यों न हो , आपको उसका एहसास नहीं होगा , दोस्तों के साथ रहने से सारी दुस्वारियां दूर हो जाती हैं !
जब आप किसी भी कारण से भर से दूर हो जाते हैं चाहे पढाई के लिए या फिर नौकरी के लिए ,तब आपका सारा परिवार पीछे छूट जाता हैं ! उस समय जिसका सहारा मिलता हैं , वो दोस्त होता हैं ! जब आपके सामने कोई समस्या आती हैं तो वो दोस्त ही होता हैं जो सबसे आगे खड़ा होता हैं !
कुछ रिश्ते जन्म के साथ -साथ ही बन जाते है जो इंसान को खुद नहीं बनाना होता है ! उस तरह के रिश्ते भगवान् के द्वारा दिया गया पारितोषिक होते हैं और उसमे हमें जो भी मिलता हैं , उसे स्वीकार करना ही होता हैं वहां चुनने की जरुरत भी नहीं होती ,क्योंकि भगवान् हमारे लिए अच्छा ही करते हैं !
कुछ लोग कहते हैं कि रिश्ते भगवान् के घर से बनकर आते हैं ! पता नहीं वो किन रिश्तों की बात करते हैं ! कहा जाता हैं कि हम कुछ नहीं कर सकते जो भगवान् ने सोच रखा है ,वही होगा !
मैं सोचता हूँ कि कुछ रिश्ते भगवान् के घर से बनकर आते हैं ,लेकिन बाकी हम खुद बनाते है और हमारा जीवन इसी बात पर निर्भर करता है कि हम किन लोगों के साथ रहते हैं ! माता - पिता ,भाई -बहन , दादा - दादी , नाना -नानी , सारे रिश्ते हमारे जन्म के साथ ही बन जाते हैं इसमें हमारा कुछ विशेषाधिकार नहीं होता हैं लेकिन जैसे -जैसे हम बड़े होते हैं तो कुछ रिश्ते खुद ब खुद बन जाते हैं ! और इन्ही रिश्तों में से एक हैं दोस्ती !
अक्सर सभी बच्चों के माता -पिता अपने बच्चों की गलती पर उसके दोस्तों को जिम्मेदार ठहराते हैं कि दोस्तों की वजह से बिगड़ गया हैं ये तो ऐसा था ही नहीं ! जरा सोचने वाली बात हैं कि अगर सभी माता -पिता दूसरे बच्चों को जिम्मेदार ठहराते हैं तो बचा कौन ? सभी अगर एक दूसरे पर उंगली उठाते हैं तो ऐसा कौन होगा जिसके तरफ उंगली नहीं होगी !दरअसल दोस्ती एक पवित्र और सच्चा रिस्ता होता हैं ! जब आप दोस्तों के साथ रहोगे चाहे कितनी भी परेशानी क्यों न हो , आपको उसका एहसास नहीं होगा , दोस्तों के साथ रहने से सारी दुस्वारियां दूर हो जाती हैं !
जब आप किसी भी कारण से भर से दूर हो जाते हैं चाहे पढाई के लिए या फिर नौकरी के लिए ,तब आपका सारा परिवार पीछे छूट जाता हैं ! उस समय जिसका सहारा मिलता हैं , वो दोस्त होता हैं ! जब आपके सामने कोई समस्या आती हैं तो वो दोस्त ही होता हैं जो सबसे आगे खड़ा होता हैं !

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