कभी न रुकना चलते जाना
भीड़ बहुत तेरे गलियारे
लगते होंगे अपने सारे
खोज सको तो, खोज लो रही
कस्ती के हैं कौन सहारे
अगर किनारा न मिल पाए
कहीं दूर तट नजर न आये
नाव तभी भी खेते जाना
कभी न रूकना चलते जाना
कुछ लोग तुम्हे मिल जायेंगे
जीवन भर साथ निभाएंगे
दर्द तुम्हे, महसूस उसे ,
पर, दर्द नहीं दिखलाएंगे
वो लोग न तुम से रूठेंगे
चाहे बाकी सब छूटेंगे
बस उन्हें छोड़कर मत जाना
फिर कभी न रुकना चलते जाना

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