Thursday, 20 April 2017

Our Traffic System And Role Of People In This

नमस्कार
मैं ऐसे ही मुद्दों को उठता हूँ जो हमारे समाज और लोगों को प्रभावित करते हैं  और जिससे हमारे समाज , राज्य , देश और संसार का कल्याण हो !
मैं आज बात कर रहा हूँ अपने ट्रैफिक सिस्टम की ! क्यूंकि हम सब जानते हैं कि ये आज कितनी बड़ी समस्या बन चुकी हैं ! रोज हजारों लोग सिर्फ इसकी वजह से  अपने प्राणों  से हाथ धो बैठते हैं क्यूंकि जाम के कारण वो सही समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाते हैं ! हम सड़क से चलते हैं तो अनायास ही कई एम्बुलैस जाम में फंसे हुए नजर आते हैं ! हमे तो इससे ज्यादा फर्क नहीं परता क्यूंकि वो हमारे करीबी नहीं होते हैं लेकिन आपको अगर सच्चाई जाननी हो तो  उस मरीज के साथ बैठे परिजनों की आँखों में झाँकने की कोशिश कीजिये ! आपको सब नजर आ जायेगा ! वो डबडबाई आँखों से ट्रैफिक सही होने का इंतजार करते रहते हैं आंखे बंद करके भगवान् से प्रार्थना करते रहते हैं कि  ट्रैफिक सही हो जाये लेकिन उन्हें ये ख्याल नहीं रहता कि ये समस्याएं तो मानव निर्मित हैं इसमें भगवान् क्या कर सकते हैं !
ट्रैफिक जाम के लिए हम भी कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं ! मैं आपको वाकया बताता हूँ कि जब भी मैं कहीं पैदल जा रहा होता हूँ तो चौराहों पर ट्रैफिक कहीं कहीं रुका हुआ मिलता हैं क्यूंकि एक तरफ की गाड़ियां पास हों तभी तो दूसरी तरफ की होंगी ! तो मैं भी इन्तजार करता रहता हूँ कि गाड़ियां पास हो जाये उसके बाद उस पार चला जाये !  आपको बता दूँ कि मेरे साथ अगर  10 लोग खड़े हों तो उसमे से 8 वहां रुकना नहीं चाहते और तेज रफ़्तार गाड़ियों के बिच दौर परते हैं अधेड़ उम्र के लोग भी बच्चों जैसा बर्ताव करते हैं मजबूरन कुछ गाड़ियां धीमी हो जाती हैं जिससे ट्रैफिक बहुत हद तक प्रभावित होता हैं ! आप ही सोचिये कि अगर दो  मिनट इंतजार कर लिया जाये तो कौन सा मोदी जी का भाषण छूटा  जा रहा होता हैं ! अगर समाज के लिए नहीं तो कम से कम अपने और अपने परिवार के बिषय में तो सोचना चाहिए ! नहीं तो क्या भरोसा हैं कि सभी गाड़ियां धीमी हो ही जाएगी ! और उस स्थिति में उसपर कोई आरोप भी नहीं लग सकता हैं क्योंकि नियम तो आप ही ने तोड़ा था न !
हमे ट्रैफिक सिस्टम को सुचारु रूप से चलने में मदद करनी ही चाहिए क्योंकि ये किसी और की नहीं ,हमारी खुद की ही मदद हैं !
आज कई जगह ट्रैफिक बत्तियों से कण्ट्रोल होने लगा हैं ! लेकिन फिर भी पुलिस की ड्यूटी जस की तस हैं क्यूंकि अब ट्रैफिक लाइट से भी रूल को follow करवाने के लिए पुलिस चाहिए क्यूंकि लोग लाइट को भी नहीं मानते हैं और नियम तोड़ देते हैं ! मैं समझता हूँ कि जब तक हमे खुद जिम्मेदारियों का एहसास नही होगा तब तक सरकार कुछ भी कर ले , मगर ज्यादा कुछ बदलने वाला नहीं हैं ! हमे खुद भी समझना होगा और लोगों को भी जागरूक करना होगा ! तभी हम इस जाम रूपी दानव से छुटकारा पा सकते हैं जो रोज जिंदगियां लील रहा हैं !
और आप यकीन मानिये की अगर हम सही हो जाएँ तो एक बेहतर समाज की रचना को कोई नहीं रोक सकता !

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